
सिलवानी। दीपावली का पर्व जहां एक ओर घरों में लक्ष्मी पूजा और रोशनी का त्योहार है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन मवेशियों की पूजा का विशेष महत्व होता है। ग्रामीण क्षेत्र में किसान और पशुपालक अपने मवेशियों को विशेष आहार देकर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। गोरैया बाबा की पूजन कर खुशहाली की कामना करते हैं। इस परंपरा के अंतर्गत मवेशियों के सींगों पर घी लगाया जाता है और उन्हें रंग-बिरंगे रंगों से सजाया जाता है। पंडित भूपेंद्र शास्त्री के अनुसार ग्रामीणों के लिए मवेशियों की पूजा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह उनके दैनिक जीवन और आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि मवेशियों का ध्यान रखने से उनकी कृपा किसान पर बनी रहती है, जिससे फसलें बेहतर होती हैं और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, दीपावली के दिन मवेशियों को विभिन्न प्रकार के अनाज दिए जाते हैं। किसान इस दिन मवेशियों को विशेष व्यंजन जैसे गुड़, चना, मक्का, नमक आदि खिलाते हैं। इस आहार में पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि मवेशियों की सेहत और ताकत बनी रहे। इस दिन मवेशियों को अच्छा भोजन देने से सालभर उनकी स्वास्थ्यवृद्धि और कार्य क्षमता बनी रहती है, ऐसा ग्रामीण मानते हैं।
सींगों पर किया श्रंगार- दीपावली के अवसर पर मवेशियों को सजाने का अनोखा तरीका अपनाया जाता है। उनके सींगों पर घी का लेप किया जाता है और उन्हें रंग-बिरंगे रंगों से सजाया जाता है। सींगों पर घी लगाने से यह माना जाता है कि मवेशियों की सेहत अच्छी रहती है और वे साल भर स्वस्थ रहते हैं। सींगों को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है, जिससे मवेशियों को कोई हानि नहीं होती है।
