
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का फैसला अब उनके लिए मुश्किलें खड़ी करता नजर आ रहा है। अमेरिका के सबसे बड़े और ताकतवर बिजनेस ग्रुप ‘अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है। चैंबर का कहना है कि इस नई नीति के तहत H-1B वीजा अर्जी पर $100,000 की फीस लगाई गई है, जो पहले केवल $750 से $1,500 थी।
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने यह केस वॉशिंगटन डीसीसी (Washington D.C.) की अदालत में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के खिलाफ फाइल किया है। चैंबर का तर्क है कि यह नई फीस न सिर्फ गैर-कानूनी है, बल्कि यह फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि फीस तय करने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।
ट्रंप प्रशासन का कहना था कि H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का मकसद ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत अमेरिकी कंपनियों को पहले अमेरिकी वर्कर्स को हायर करने के लिए मजबूर करना है। लेकिन चैंबर का तर्क है कि $100,000 जैसी भारी फीस से छोटे और मीडियम बिजनेस विदेशी टैलेंट को हायर नहीं कर पाएंगे, जिससे H-1B प्रोग्राम का मूल मकसद ही खत्म हो जाएगा और छोटे कारोबारों को नुकसान होगा।
