भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि पिता यदि कर्तव्यनिष्ठ होगा तो संतान संस्कारवान बनेगी और संतान कर्तव्यनिष्ठ होगी तो पितृभक्ति अपने आप उभरेगी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अधिकारों की बात तो करती है पर कर्तव्य भूल जाती है। पहले लोग कम पढ़े-लिखे होते हुए भी कर्तव्यनिष्ठ थे। श्रीराम ने अधिकार होते हुए भी पिता की आज्ञा पालन कर आदर्श प्रस्तुत किया। मुनि श्री ने कहा कर्तव्यों की हीनता अधिकारों का नर्तन, कल और आज में बस इतना ही परिवर्तन। उन्होंने कहा परिवार में सभी यदि अपने कर्तव्य निभाएं तो जीवन सुखमय होगा। युवाओं से उन्होंने कहा कि दूसरों को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी खुशी के लिए कार्य करें। परिणाम की चिंता छोड़ पुरुषार्थ करें, असंतोष दुख और हानि का कारण बनता है।
