
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली उल्टी दस्त की बीमारी पर काबू पाने के दावों के बीच हालात अभी सामान्य नहीं हो पाए हैं. अस्पतालों में अब भी 20 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि 149 मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है. वहीं अब तक मृतकों की संख्या 16 सामने आ चुकी है. हालांकि राहत की बात यह रही कि 6 मरीजों की हालत में सुधार होने पर उन्हें आईसीयू से बाहर शिफ्ट किया है. वहीं संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर फील्ड ऑपरेशन शुरू कर रखा है.
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाके में 16 फील्ड टीमें तैनात की हैं, जिनमें मेडिकल और नर्सिंग अधिकारियों के साथ आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और एनजीओ के सदस्य शामिल हैं. टीमों ने रिंग सर्वे और फॉलोअप सर्वे के तहत 5079 घरों तक पहुंचकर 25 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की. इस दौरान 65 लोगों में हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें मौके पर ही दवा दी गई, जबकि 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप किया. 15 मरीजों को ओपीडी से अस्पताल रेफर किया. संक्रमण की रोकथाम के लिए घर घर क्लोरीवेट ड्रॉप वितरित किए जा रहे हैं. मरीजों और स्वस्थ हो चुके लोगों को दवाओं का पूरा डोज लेने की सख्त समझाइश दी जा रही है, वहीं धात्री माताओं को छह माह तक बच्चों को केवल मां का दूध पिलाने के निर्देश दिए हैं. हालात की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने स्वयं भागीरथपुरा पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने क्षेत्र में लोगों को बांटे जा रहे पानी को हाथ में लेकर चखकर उसकी गुणवत्ता जांची. प्रशासन के अनुसार सभी बोरिंगों में दवा डाली गई है, इसी कारण एहतियातन बोरिंगों को करीब आठ घंटे तक बंद रखा गया. इसके बावजूद स्थानीय लोगों में नर्मदा लाइन से मिलने वाले पानी को लेकर भरोसा कमजोर पड़ा है और लोग अब भी आशंकित हैं. कलेक्टर के निर्देश पर क्षेत्र में पांच एम्बुलेंस तैनात की गई हैं और 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है. मरीजों को एमवाय अस्पताल, अरविंदो अस्पताल और बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल में रेफर किया जा रहा है. निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को भी नि:शुल्क जांच, उपचार और दवाएं देने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही अन्य जिलों से एपिडिमियोलॉजिस्ट, शिशु रोग विशेषज्ञ और मेडिसिन विशेषज्ञों को भी इंदौर बुलाया है. मिशन संचालक ने भी प्रभावित क्षेत्र और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर इलाज, रेफरल सिस्टम और दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की. अस्पतालों में कुल 354 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं, जिनमें से 205 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, लेकिन अब भी 20 मरीजों का आईसीयू में होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.
