रीवा:शहर के अंदर नियमो को ताक में रखकर आवासीय क्षेत्र में डेयरी संचालित है और यह सब हो रहा है नगर निगम प्रशासन की मेहरबानी से, मलमूत्र सब नालियों में समाहित हो रहा है. जिसके चलते पानी निकासी के लिये बनी नालियां जाम हो रही है तो दूसरी तरफ दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान है.गौरतलब है कि एक सप्ताह पूर्व नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर शहर में चल रही अवैध डेयरी को लेकर तामझाम के साथ दो दिन कार्यवाही हुई और पशुओ को जप्त किया गया. उसके बाद कार्यवाही ठप्प हो गई, केवल खानापूर्ति की गई.
सवाल यह है कि शहर में चल रही डेरियों पर कार्यवाही क्यो नही की जा रही है, जबकि लगातार शिकायते मिल रही है. उसके बाद भी कार्यवाही की केवल खानापूर्ति होती है. आकड़ो की माने तो शहर के अंदर छोटी-बड़ी मिलाकर दो सौ से अधिक डेयरी संचालित है. कई डेयरी तो ऐसी है जो सडक़ के किनारे संचालित हो रही है. जिसके चलते आवागमन भी बाधित होता है. आवासीय क्षेत्र में चल रही डेयरी का जो मल-मूत्र होता है वह सब सीधे नाली और नाले में बहाया जाता है और गन्दगी से आसपास के लोगो का रहना मुश्किल होता है. वर्षो से शहर में चल रही अवैध डेयरी एक समस्या बन चुकी है लेकिन नगर निगम खानापूर्ति की कार्यवाही करता है. डेयरी संचालक न तो लायसेंस ले रहे और न ही नियमों का पालन कर रहे है.
अवैध डेयरी से मोहल्ले के लोग परेशान
घोघर मोहल्ले में कई अवैध डेयरी संचालित है और यहा के लोग परेशान है. इसी तरह तकिया एवं पचमठा मोहल्ले में भी अवैध डेयरी चल रही है. मनोज वर्मा ने बताया कि डेयरी के कारण मोहल्ले के लोग परेशान है, मवेशियो को छोड़ दिया जाता है. इतना ही नही मलमूत्र सडक़ और नालियो में बहाया जाता है. नगर निगम प्रशासन कोई कार्यवाही नही करता. जबकि स्थानीय वार्ड पार्षद सहित अन्य जगहो पर शिकायत की जा चुकी है. इसी तरह वार्ड 15 निवासी दिनेश पटेल ने बताया कि वार्ड में दो दर्जन से ज्यादा डेयरी है. जिनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही होती. मूलमूत्र नालियों में बहाया जाता है और दुर्गंध से मोहल्ले के लोग परेशान रहते है.
अवैध डेयरी पर कार्यवाही हो रही है: स्वास्थ्य अधिकारी
स्वास्थ्य अधिकारी मुरारी कुमार ने बताया कि शहर के अंदर जो भी अवैध डेयरी है उनके खिलाफ लगातार कार्यवाही की जा रही है. जुर्माना लगाने के साथ पशुओ को जप्त कर गौशाला भेजा जा रहा है. साथ ही शहर के बाहर डेयरी संचालित करने की समझाइश दी जा रही है.
