सतरिया कांड मानवता के खिलाफ अपराध, भाजपा सरकार में बढ़ रहा जातीय वैमनस्य

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दमोह जिले के सतरिया गांव में हुई अमानवीय और स्तब्ध कर देने वाली घटना पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान का स्वागत किया। उच्च न्यायालय ने इस घटना को “स्तब्ध करने वाली” बताते हुए स्पष्ट कहा कि दोषियों पर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।

डॉ. नायक ने कहा कि यह घटना न केवल अमानवीयता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भाजपा शासन के दौरान समाज का ताना-बाना राजनीतिक लाभ के लिए किस प्रकार से टूट रहा है और जातीय वैमनस्य को बढ़ावा दिया जा रहा है।

घटना का सार:

डॉ. नायक के अनुसार, दमोह जिले के सतरिया गांव में ग्रामीणों ने निर्णय लिया था कि शराब पीने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। अनुज पांडे, जो शराब बेचता था, ने सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी थी और मामला वहीं समाप्त हो गया था। बाद में, पुरुषोत्तम कुशवाहा नामक व्यक्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से एक भ्रामक वीडियो तैयार किया, जिसमें अनुज पांडे को जूते की माला पहने दिखाया गया।

इस वीडियो से आक्रोशित होकर अनुज पांडे और उसके परिवारजनों ने पुरुषोत्तम कुशवाहा को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर विवश किया और उसे गंदा पानी पिलाया। डॉ. नायक ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” और “संविधान का घोर उल्लंघन” बताया।

राजनीतिक साजिश का आरोप:

डॉ. नायक ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने इस पूरी घटना को “दो समुदायों के बीच टकराव” के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उन्होंने कहा, “अनुज पांडे शराब बेचता है और पुरुषोत्तम कुशवाहा ने फर्जी वीडियो बनाया — दोनों ही अपराधी हैं, लेकिन कोई भी किसी जाति का प्रतिनिधि नहीं है।”

ग्वालियर की घटना का उल्लेख करते हुए, जहाँ एक व्यक्ति ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, डॉ. नायक ने कहा कि भाजपा ऐसे तत्वों को बढ़ावा देकर सामाजिक सौहार्द को कमजोर कर रही है।

डॉ. नायक की मांगें:

1. उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अनुज पांडे पर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।

2. पुरुषोत्तम कुशवाहा के खिलाफ साइबर अपराध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।

3. सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ठोस कदम उठाए।

4. जातीय आधार पर लोगों को भड़काने वाले सभी तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अंत में डॉ. नायक ने कहा, “यह केवल दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि भाजपा शासन में फैलते संस्थागत जातिवाद की भयावह तस्वीर है।”

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