डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच में भारत ने हर्बल औषधि विनियमन में अग्रणी भूमिका निभाई

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (वार्ता) आयुष मंत्रालय ने इंडोनेशिया के जकार्ता में विश्व स्वास्थ्य संगठन – अंतरराष्ट्रीय हर्बल औषधि नियामक सहयोग (डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच) की 16वीं वार्षिक बैठक में बुधवार को हर्बल औषधियों के विनियमन में अपनी अग्रणी भूमिका का प्रदर्शन किया।

जकार्ता में 14 से 16 अक्टूबर 2025 तक आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामंजस्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्वभर के विनियामक प्राधिकरणों और विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया है।

इस बैठक में भारत सरकार की तरफ से डॉ. रघु अरक्कल, सलाहकार (आयुर्वेद) और उप महानिदेशक (प्रभारी), आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में डॉ. रघु अरक्कल ने “हर्बल औषधियों की प्रभावकारिता और इच्छित उपयोग (कार्य समूह-3)” पर रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा में भारत के विकसित होते विनियामक ढांचे और साक्ष्य-आधारित नीतिगत पहलों पर प्रकाश डाला गया।

बैठक में भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (पीसीआईएमएंडएच) के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह ने “हर्बल औषधियों की सुरक्षा और विनियमन (कार्य समूह-1)” पर कार्यशाला रिपोर्ट प्रस्तुत की और “हर्बल औषधियों की सुरक्षा और विनियमन – भारतीय परिप्रेक्ष्य” पर अलग से प्रस्तुति भी दी।

दोनों कार्यशालायें विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गईं और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा पीसीआईएमएंडएच के सहयोग से इसकी मेजबानी की गई। इसके अलावा, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश दाधीच ने डॉ. सिंह के साथ “हर्बल औषधियों के गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण और सततता” पर प्रस्तुतिकरण किया। डॉ. दाधीच ने औषधीय पौधों के सतत उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण व मानकीकरण सुनिश्चित करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी विचार साझा किए।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हर्बल औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के वैश्विक मानकों को आकार देने में भारत की केंद्रीय भूमिका और योगदान को रेखांकित किया। डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच के संयोजन में अंतरराष्ट्रीय विनियामक निकायों के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से भारत पारंपरिक चिकित्सा और प्राकृतिक उत्पाद-आधारित स्वास्थ्य सेवा में विज्ञान-आधारित एवं सामंजस्यपूर्ण विनियमन को बढ़ावा देता आ रहा है।

 

 

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