
ग्वालियर। ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर पर पुरानी छावनी के बीलपुरा गांव में सालों से रह रहे 12 संदिग्ध बांग्लादेशी गायब हो गए हैं। ये पुलिस की निगरानी में थे। इनके दस्तावेज पुलिस ने जांच के लिए भेजे थे, लेकिन पुलिस को रिपोर्ट मिलती उससे पहले ही ये सभी गायब हो गए और इन्हें पनाह देने वाला अबरार खान भी लापता है। जब पुलिस बीलपुरा गांव पहुंची तो पता लगा कि ये डेढ़ दो महीने पहले ही यहां से गायब हो चुके हैं।
ये लोग पुरानी छावनी इलाके में रायरू डिस्टलरी के आसपास कचरा बीनने या अन्य मजदूरी का काम करते थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पुलिस ने जब पश्चिम बंगाल और बिहार से आए संदिग्ध लोगों का सर्वे शुरू किया था, तब 94 लोग चिह्नित किए गए थे। ये उनमें शामिल नहीं थे। इनके दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने इनकी छानबीन की थी। फिलहाल भागे संदिग्धों में से कुछ की लोकेशन चेन्नई तो कुछ की कोलकाता में आ रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के समय जब मध्यप्रदेश पुलिस का गोपनीय सर्वे शुरू हुआ और इनके दरवाजे पर पड़ताल के लिए पुलिस ने दस्तक दी, तो इन्हें पकड़े जाने का संदेह हुआ।पुलिस इनकी पड़ताल करती रह गई और ये लोग ग्वालियर से गुपचुप तरीके से भाग गए। कुछ लोग चेन्नई तो कुछ बंगाल भागे हैं।
ये लोग बीलपुरा में खंडहर में रहते थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद करीब 3 माह पहले सर्वे शुरू हुआ था। इसी सर्वे के आधार पर बंगाल, बिहार, झारखंड से आए लोगों की सूची तैयार हुई थी। इसमें ग्वालियर के 94 लोग संदिग्ध चिह्नित किए गए थे, लेकिन इस सूची के अलावा भी 12 लोग चिह्नित हुए थे, जो पश्चिम बंगाल के रास्ते ग्वालियर के पुरानी छावनी स्थित बीलपुरा गांव में रह रहे थे।इनके पास से जो दस्तावेज मिले, वह संदिग्ध थे। इन्हें पुलिस ने जांच में लिया और पश्चिम बंगाल से इनको क्रॉस चेक किया जा रहा था, लेकिन उससे पहले ही यह सभी संदिग्ध लापता हो गए।
