अपने अंदर की बुराइयों की आहुति ही वास्तविक हवन

भोपाल।अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में चल रहे 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि विधान के अंतिम दिन मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि हवन केवल धुआं उड़ाने का नाम नहीं, बल्कि अपनी बुराइयों की आहुति देना ही वास्तविक हवन है। उन्होंने कहा कि इन आठ दिनों में यदि आपके भीतर श्रद्धा बढ़ी और बुराइयों से विमुखता आई, तो यही सच्चा पुण्य है। मुनि श्री ने बताया कि व्यक्ति को अपने भीतर की भौतिक आकांक्षाओं को त्यागकर आध्यात्मिक चेतना जगानी चाहिए। कार्यक्रम में मुनि श्री संधान सागर सहित अन्य संत उपस्थित रहे।

 

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