ब्यावरा: संयुक्त परिवार की परंपरा भारतीय समाज की पहचान रही है. एकल परिवार की व्यवस्था हमारे देश की परंपरा नहीं है, बल्कि यह विदेशी चलन है. हमारी संस्कृति में परिवार केवल माता-पिता और बच्चों तक सीमित नहीं, बल्कि दादा-दादी, चाचा-चाची, भाई-बहन, सभी का स्नेह और साथ होता था.उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत रविवार को नगर में नवदंपत्ति मिलन कार्यक्रम में संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह और संघ के अखिल भारतीय अधिकारी सुरेश सोनी द्वारा मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए गये.
भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में युवा दंपत्तियों के साथ ही संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सोनी ने कहा कि संयुक्त परिवार में रहकर बच्चे न केवल संस्कार सीखते हैं, बल्कि अपने बड़ों के अनुभवों से जीवन जीने की कला भी समझते है. समय के साथ एकल परिवार का चलन बढऩे से आपसी संवाद और पारिवारिक एकजुटता में कमी आई है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है.
पारिवारिक जुड़ाव की भावना विकसित होगी
उन्होंने संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव पर जोर देते हुए कहा कि यदि परिस्थितियों के चलते कोई परिवार एक साथ नहीं रह पा रहे है, तो सप्ताह में कम से कम एक दिन सभी को एकत्र होकर भोजन करने की परंपरा शुरू करनी चाहिए. इससे आपसी संबंध मजबूत होंगे और आने वाली पीढिय़ों में पारिवारिक जुड़ाव की भावना विकसित होगी.
उन्होंने कहा कि हर हिंदू परिवार में धार्मिक ग्रंथ और साहित्य होना चाहिए ताकि बच्चे अपने धर्म, संस्कृति, त्यौहारों और महापुरुषों के बारे में जान सके. उन्होंने नवदंपत्तियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपने व्यवहार, वाणी और जीवनशैली से परिवार में संस्कारों का वातावरण बनाना चाहिए.
संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को न भूले
श्री सोनी ने युवाओं से आव्हान किया कि वे आधुनिकता को अपनाएं लेकिन अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को न भूले. उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार न केवल सामाजिक सुरक्षा देता है बल्कि मानसिक और भावनात्मक मजबूती का भी आधार होता है. परिवार ही वह पहला विद्यालय है जहां बच्चा जीवन के संस्कार सीखता है.
कार्यक्रम में 150 से अधिक नवयुगल उपस्थित रहे.
परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने और निभाने का संकल्प लिया. नवदंपत्तियों के लिए विशेष संवाद सत्र भी रखा गया, जिसमें उनसे परिवारिक जीवन में संवाद, सहयोग और समझ बढ़ाने पर चर्चा की गई.इस अवसर पर संघ के विभाग संघचालक उदयसिंह चौहान, नगर संघचालक राधेश्याम शर्मा मंचासीन रहे. आयोजन का मुख्य उद्देश्य नवदंपत्तियों में पारिवारिक एकता, भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था.
