उद्योग जगत के नेताओं ने नौकरियों की सुरक्षा के लिए जापान के संयम की सराहना की

बेंगलुरु, 11 अक्टूबर (वार्ता) टाटा हिताची कंस्ट्रक्शन मशीनरी के प्रबंध निदेशक संदीप सिंह ने कहा है कि भारत को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एआई और स्वायत्त विनिर्माण का उदय आज के रोजगार और सामाजिक संतुलन की कीमत पर न हो।

श्री सिंह ने जापान द्वारा स्वचालन को सतर्कतापूर्वक अपनाने की तुलना करते हुए शनिवार को कहा कि जापान एक ऐसे देश का उदाहरण बना हुआ है जो अत्याधुनिक तकनीक को अपनाते हुए भी अपने कार्यबल को प्राथमिकता देता है। “जापानी उद्योग अपने लोगों को रोजगार देने के प्रति अत्यधिक सचेत हैं। वे स्वचालन लागू करेंगे, लेकिन अपने कर्मचारियों की कीमत पर कभी नहीं। भले ही उत्पादन की लागत थोड़ी अधिक हो, वे जापान में निर्माण करना पसंद करते हैं – गुणवत्ता बनाए रखने और नौकरियों की रक्षा दोनों के लिए, ” उन्होंने कहा कि जापान का दृष्टिकोण चीन और अमेरिका जैसे देशों के विपरीत है, जिन्होंने तेजी से स्वचालन को अपनाया है

उन्होंने कहा, “वर्जीनिया में हमारी चार वैश्विक फ़ैक्टरियों में से एक लाइट आउट या स्वायत्त सुविधा है, लेकिन भारत में ऐसी फ़ैक्टरियों का विज़न अभी कुछ साल दूर है। स्वचालन की लागत और हमारी विशाल कार्यशील जनसंख्या इसे फ़िलहाल अव्यावहारिक बनाती है।” उन्होंने बताया कि भारत के बाहर दस लाख वर्ग फुट की इकाई में लगभग 60 प्रतिशत फ़ैक्टरी कार्य रोबोट द्वारा किया जाता है, जबकि भारत में स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी की लागत और कुशल जनशक्ति की उपलब्धता का अर्थ है कि भारत को धीरे-धीरे स्वचालन की ओर बढ़ना होगा।”

उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग मानवीय प्रयासों को प्रतिस्थापित करने के बजाय उनके पूरक के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम एआई का उपयोग मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स इनबाउंड और आउटबाउंड में दक्षता में सुधार, समय और लागत कम करने के लिए कर रहे हैं, लेकिन जनशक्ति की कीमत पर नहीं। हम उत्पादकता बढ़ाते हुए रोज़गार बनाए रखने के प्रति बहुत सचेत हैं।”

प्रदीप फॉस्फेट्स के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीओओ) राजीव नांबियार नेउभरते बाजारों में सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि भारत में प्रौद्योगिकी अपनाने में उसके विशाल ब्लू-कॉलर कार्यबल को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर एआई सस्ता भी हो जाता है, तो भी कर्मचारियों के लिए एक परिवर्तन प्रक्रिया होनी चाहिए। हम केवल छोटी आबादी वाले देशों के मॉडल का अनुसरण नहीं कर सकते।” उन्होंने कहा कि एआई सब कुछ हल कर सकता है। उन्होंने कहा, “यह विचार कि एआई ही सब कुछ है, एक मिथक है। असली लक्ष्य सभी के लिए एआई होना चाहिए इसका ज़िम्मेदारी और समावेशी उपयोग।” उन्होंने कहा कि एआई को अपनाने का मूल्यांकन केवल वित्तीय आधार पर ही नहीं, बल्कि इसके सामाजिक और मानवीय प्रभाव के आधार पर भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कॉर्पोरेट नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा, “जब हम एआई के लिए व्यावसायिक मामला बनाते हैं, तो हमें प्रौद्योगिकी प्रवास के व्यापक सामाजिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए।”

 

 

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