
छिंदवाड़ा। परासिया क्षेत्र में दो वर्षों से प्रतिबंधित दवाएं खुलेआम बिक रही थीं, लेकिन न स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की और न औषधि नियंत्रण अमले ने जांच की जहमत उठाई। बच्चों की मौतों के बाद जब हड़कंप मचा, तभी प्रशासन की नींद टूटी।
सूत्रों के अनुसार, बीते दो वर्षों से परासिया में प्रतिबंधित एफडीसी सिरप धड़ल्ले से बेचे जा रहे थे। भारत सरकार की गाइडलाइन होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने कोई निगरानी नहीं की। मौतों की श्रृंखला शुरू होने पर प्रशासन ने कोल्डरिफ सहित कई सिरपों पर रोक लगाई।
मामले में श्री सन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रंगनाथन को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने शनिवार को उससे दिन भर पूछताछ की। एसपी स्वयं परासिया पहुंचे और जांच की मॉनिटरिंग की।
फिलहाल रंगनाथन 10 दिन की पुलिस रिमांड पर है और पूछताछ में सहयोग कर रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दक्षिण भारत निवासी आरोपी को हिरासत में साउथ इंडियन भोजन परोसा जा रहा है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब दवा वितरण श्रृंखला की जांच में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई अन्य मेडिकल स्टोर और डॉक्टर भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।
