
सतना।प्रदेश के राज्यपाल और कुलाधिपति मंगु भाई पटेल ने नानाजी के कार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देष्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि वंचित समुदाय के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना भी है। उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि नानाजी द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय में अध्ययन करने का मौका आप सभी विद्यार्थियों को सौभाग्य के रूप में मिला है। उनके बौद्धिक विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन की दिशा तय करें और सुखी तथा समृद्धि जीवन की ओर अग्रसर हो।
यह बात कुलाधिपति श्री पटेल ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के 13 वे दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए कही.समारोह के मुख्य अतिथि और प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार रहे। विषिष्ट अतिथि राष्ट्रीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली डॉ. अतुल कोठारी ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो0 भरत मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन और प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कुलगुरू ने उपाधि धारकों को दीक्षांत शपथ भी दिलाई।समारोह में छात्रों को आशीष देते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आप बड़ी नौकरी और बड़े पद पायें लेकिन ये याद रखें कि आपको इस मुकाम तक पहुॅंचाने वाले आपके माता-पिता, आपका समाज, आपका देश और आपके शिक्षक हैं अतः समृद्धि और सफलता के शिखर पर पहूॅंचकर इन्हें कभी नही भूलें। समृद्धि पुरूषार्थ से सभी को मिल सकती है पर मेरी इच्छा है कि आप समृद्धि के साथ उदारता को भी प्राप्त करें। जैसे चित्रकूट के कण-कण में नानाजी की उदारता और उनकी संकल्प शक्ति के दर्शन होते हैं वैसे ही आपके कार्यों से आपकी और आपके विश्वविद्यालय की कीर्ति दूर-दूर तक पहुॅचे। आज के समय में लक्ष्य से भटकाने वाले बहुत से आकर्षण समाज में हैं। इनसे बचकर अपना समय और शक्ति राष्ट्र और स्व कल्याण में लगायें। विकसित भारत में हमारा जीवन कैसा हो इसके लिए आपने जो षिक्षा ग्रहण की है। उसका सदुपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करते हुए सभी का जीवन समृद्ध और सुखमय बनाये।
विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विष्वविद्यालय की नींव रखने वाले राष्ट्र ऋषि नानाजी देषमुख की जन्म जयंती के अवसर दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है। नानाजी देषमुख ने समाज के परिवर्तन के लिए चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया। भारत की नवीन शिक्षा नीति में नानाजी का दृष्टिकोण समाहित हुआ है। कृषि के क्षेत्र में स्वास्थ्य, विज्ञान के क्षेत्र में हित नवाचार करते हुए समाज के हित में समाधान ढूढे जाये। उन्होंने कहा कि 2047 में विकसित भारत बनाने की दिषा में उद्योग पति, किसान, युवाओं सभी की भूमिका होगी।
राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास डॉ. अतुल कोठारी ने दीक्षांत भाषण में कहा कि किसी भी विद्यार्थी के लिए यषस्वी और सार्थक जीवन का यही अर्थ है ि कवह अपने व्यवसायी जीवन में सफलता प्राप्त करके स्वयं के परिवार का निर्वाह करते हुए समाज के लिए भी कुछ योगदान करने में सक्षम बनें। ताकि वह समाज राष्ट्र और मानवता के कल्याण में अपना योगदान देने के लिए हमेषा तत्पर रहे।
कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारत रत्न नानाजी देषमुख ने 75 वर्ष की आयु में चित्रकूट आकर यहां के समाज और वंचित समुदाय के साथ संवेदना के साथ जुडकर चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के निर्माण से समाज परिवर्तन के संकल्प को लेकर इस विष्वविद्यालय में व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा है।
समारोह के आरम्भ में विश्वविद्याय के कुलगुरू प्रो. भरत मिश्रा ने प्रगति प्रतिवेदन और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, शोध, प्रसार और प्रशिक्षण के परम्परागत आयामों के साथ-साथ संसाधन सृजन का नया आयाम जुडा है। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एव प्रत्ययन परिषद (नेक) द्वारा विष्वविद्यालय को ए डबल प्लस ग्रेड से सम्मानित किया गया है।
दीक्षांत समारोह में नियमित पाठ्यक्रम की कुल 799 उपाधियां प्रदान की गई
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में विष्वविद्यालय के नियमित पाठ्यक्रम में 799 उपाधियां विद्यार्थियों को प्रदान की गई। जिनमें 762 स्नातक और स्नातकोत्तर तथा 37 पीएचडी की उपाधियां षामिल हैं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने मंच से 35 सर्वश्रेष्ठ उपाधि धारियों को गोल्ड मेडल तथा कृषि संकाय की दिशा साहू को नानाजी देषमुख स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया। इस अवसर पर विष्विद्यालय के दूरवर्ती अध्ययन एवं सतत षिक्षा केन्द्र 5310 स्नातकोत्तर, 3758 स्नातक तथा मुख्यमंत्री नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के 3414 स्नातकों और 12341 स्नातकों को उपाधियां प्रदान की गई।
