नौ माह से बिना पंजीयन चल रहा था हॉस्पिटल, सिस्टम की लापरवाही से गई मासूम की जान

सीहोर। ग्राम पिपलिया मीरा निवासी दो वर्षीय दीक्षा कुशवाह की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है. जिस मुस्कान हॉस्पिटल में दीक्षा का इलाज हुआ, वह पिछले नौ माह से बिना पंजीयन संचालित हो रहा था. सरकारी रिकॉर्ड में दिसंबर 2024 में इसे बंद दिखाया गया था, यहां तक कि अस्पताल बंद होने के फोटोग्राफ भी विभाग को भेजे गए थे. इसके बावजूद अस्पताल लगातार चलता रहा और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी.

2 अक्टूबर को दीक्षा की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे बरखेड़ी स्थित मुस्कान हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉ. अशोक विश्वकर्मा के इंजेक्शन लगाने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई. बाद में भोपाल के मनन चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

गंभीर बात यह है कि परिजनों ने 4 अक्टूबर को ही मुस्कान हॉस्पिटल की शिकायत पुलिस से की थी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब आरोपी डॉक्टर के फरार होने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है.

सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि दिसंबर 2024 में ही अस्पताल को बंद कर सील किया गया था. दोबारा अवैध रूप से संचालन मिलने पर उसे पुनः सील कर दिया गया है और संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.

 

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