इंदौर: आखिरकार नवलखा चौराहे के पास बने अस्थाई बस स्टैंड को शहर की सीम के पास स्थानांतरित कर ही दिया जिसके बाद प्रदेश में इसकी चर्चा होने लगी. इसकी सफलता की चर्चा सिर्फ पार्टी स्तर पर ही सीमित रह गई क्योंकि इसका खामियाजा आम जनता को जो भुगतना पड़ रहा है. यह पीड़ा तो सिर्फ वही जानती है.शहर की यातायात व्यावस्था को सुधारने के लिए पिछले दिनों नवलखा अस्थाई बस स्टैंड को न्यू आरटीओ के पास स्थानांतरित कर दिया गया.
अब यहां से सैकड़ों बसें सुचारू रूप से संचालित हो रही है. शासन-प्रशासन द्वारा नया बस स्टैंड शुरू तो कर दिया गया लेकिन यात्रियों की समस्याएं बढ़ गई हैं. उदाहरण के तौर पर जिस यात्री को अपने गांव से शहर के अंदर नवलखा बस स्टैंड तक आने में ढाई सौ रूपए लगते थे, अब उसी यात्री को केवल नए बस स्टैंस तक के ढाई सौ रुपए देना पड़ रहे हैं. शहर के अंदर नवलखा आने तक टैक्सी का किराया दो से ढाई सौ रूपए तक देना पड़ रहा है. यात्रियों के लिए टैक्सी चालकों में झगड़े की स्थिति बनती है. रात्रीकालीन बसों से उतने वाली महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं क्योंकि नए बस स्टैंस से पालदा नाका तक का पूरा मार्ग रात को सुनसान हो जाता है.
इनका कहना है
गांव से शहर तक दो बार पैसा खर्च हो रहा है. यात्रियों पर किराए की डबल मार पड़ रही है. शासन बसों के किराए में कटौती करे या फिर नवलखा तक फ्री सेवा दे.
– संतोष शिंदे, सतवास
महंगे किराए के करण नौकरी करने वालों को बेरोज़गारी झेलनी पड़ेगी. वहीं व्यापारी भी विकल्प ढूंढेगा. इससे शहर पर बुरा असर पड़ने वाला है. तीन ईमली बस स्टैंड स्थान बहुत अच्छा विकल्प था.
– योगेश सिंगनाथ, हरदा
देर रात आने वाली बस से आने वाले यात्रियों को शहर में जाने के लिए टैक्सी एकमात्र साधन है. रात में सिटी बस बंद हो जाती है जिसके बाद मनमाना टैक्सी भाड़ा वसूलते हैं.
– गोपाल कुश्वाह सतवास
