इंदौर: शहर से लेकर तहसीलों और गांवों तक आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा. हर महीने सैकड़ों लोग इनके हमले का शिकार बन रहे हैं. सिर्फ सितंबर माह में ही करीब 4 हजार 591 लोग विभिन्न जीव-जंतुओं के हमले से घायल हुए, जिनमें अकेले 3 हजार 997 लोग कुत्तों के काटने से पीड़ित हैं.हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक के डॉ. आशुतोष शर्मा ने नव भारत को बताया कि सितंबर महीने में 3,997 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए.
इसके अलावा 294 लोगों को बिल्ली, 211 को चूहों, 60 को बंदरों और 29 लोगों को अन्य जीव-जंतुओं ने काटा. सभी को टिटनेस, एंटी इंफेक्शन और एंटी रैबीज के टीके लगाए गए. डॉ. शर्मा ने बताया कि यह आंकड़े सिर्फ हुकुमचंद क्लिनिक के हैं. जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों के आंकड़े इससे अलग हैं. ऐसे में वास्तविक संख्या और भी ज्यादा हो सकती है. वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी का कहना है कि जिले में सितंबर माह के दौरान 4,587 लोग कुत्तों के हमले की चपेट में आए हैं. वहीं अप्रैल से सितंबर तक के 6 महीनों में 29 हजार 575 लोग आवारा कुत्तों के काटने से घायल हुए हैं.
व्यवस्थाओं पर खड़े हो रहे सवाल
लगातार बढ़ती इन घटनाओं ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर में हर महीने औसतन पांच हजार से अधिक लोग इन हमलों का शिकार बन रहे हैं, लेकिन आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण की कोई ठोस कार्ययोजना अब तक नहीं दिख रही.
