
इंदौर. रविवार सुबह से ही शहर की सड़कों पर संघ के हजारों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में दिखाई दिए. ‘संघ शक्ति कलियुगे’ के उद्घोष और कदमताल के साथ 34 स्थानों से निकले पथ संचलन ने पूरे शहर को उत्साह और रंगों में डुबो दिया. व्यापारियों और नागरिकों ने फूलों की वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया.
राजबाड़ा से सुबह 9 बजे शुरू हुआ पथ संचलन शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरते हुए जनता में जोश और उत्साह भरता चला गया. हर पथ संचलन में लगभग 5,000 स्वयंसेवक शामिल थे, जिनमें छात्र, युवा, वरिष्ठ नागरिक और पेशेवर वर्ग—डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, उद्योगपति—भी शामिल थे. भंवरकुआ, चिमनबाग, बंगाली चौराहा, संगम नगर और राजीव आवास निरंजनपुर जैसे क्षेत्रों में मार्ग किनारे नागरिकों की भीड़ ने पुष्प वर्षा और ढोल-ढमाकों के साथ स्वागत किया. मार्गों पर भगवा झंडों और बैनरों ने पथ संचलन को और भव्य बना दिया. वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला, रमेश मेंदोला के साथ ही व्यापारी और संघ समर्थक व विधायक महेंद्र हार्डिया सहित अन्य वरिष्ठ लोग भी स्वयंसेवकों के बीच शामिल हुए. वहीं अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार कनाडिया क्षेत्र के पथ संचलन में मौजूद थे और स्वयंसेवकों को संघ के शताब्दी वर्ष का संदेश दिया. पथ संचलन का हर रूट लगभग 3-4 किलोमीटर लंबा था, जिसमें घोष दल आगे और स्वयंसेवक कतार में चलते रहे. 70-80 वर्ष के वरिष्ठ स्वयंसेवक, जो लंबी दूरी तय नहीं कर सकते थे, छतों और मंचों से उत्साहपूर्ण स्वागत करते दिखाई दिए.
जानकारी के अनुसार पूरे शहर में पथ संचलन की दूरी लगभग 170 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली रही. वहीं पुलिस और प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित किया, जिससे आम नागरिकों को कोई परेशानी नहीं हुई. शाम 5.15 बजे विश्वकर्मा नगर, स्टेडियम ग्राउंड और नन्दा नगर जनता क्वार्टर से पथ संचलन का अंतिम चरण संपन्न हुआ. पिछले साल लगभग 65,000 स्वयंसेवक पथ संचलन में शामिल हुए थे, लेकिन इस बार 2 लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता दर्ज कर इंदौर में इसे ऐतिहासिक बना दिया.
यह आयोजन न केवल संघ के अनुशासन और शक्ति को दिखाता है, बल्कि शहरवासियों के लिए भी राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का उत्सव बन गया.
