सड़कें बनीं लाउडस्पीकर मंडी, नागरिकों का सब्र टूटने को

मंडला। शहर की सड़कों पर अब ठेले-खोमचे नहीं, बल्कि तेज आवाज़ वाले चौंगों की मंडियां सजने लगी हैं। रेडक्रास बिल्डिंग से लेकर ज्ञानदीप स्कूल तक हर कोने पर लाउडस्पीकरों की कर्कश पुकार गूंज रही है। फल-सब्ज़ियां, खिलौने, और सस्ते सामान बेचने वाले व्यापारी अब रिकार्डिंग बजाकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, और यह ध्वनि प्रदूषण शहर की शांति को निगलता जा रहा है।मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, अखबारों में खबरें छप चुकी हैं, मगर प्रशासन की ओर से कार्रवाई का सन्नाटा है। नतीजा यह कि नियम तोड़ने वालों के हौसले पहले से ज़्यादा बुलंद हैं। कल शाम रेडक्रास के सामने एक फल विक्रेता घंटों तक लाउडस्पीकर से रिकार्डिंग बजाता रहा, तो आज सुबह ज्ञानदीप स्कूल के बाहर वही नज़ारा दोहराया गया।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की इस खामोश लापरवाही से अब सड़कों पर अराजकता की स्थिति बनती जा रही है। ट्रैफिक जाम, बच्चों के पढ़ाई के माहौल में खलल, और बुजुर्गों की तकलीफें सब आवाज़ के शोर में दब गई हैं। विरोध करने पर कई बार दुकानदार झगड़े पर उतारू हो जाते हैं, जिससे आम आदमी खुद को असहाय महसूस कर रहा है।नागरिकों का कहना है कि अगर यह रवैया जारी रहा तो शहर की पहचान “शांत मंडला” से बदलकर “शोर वाला मंडला” बन जाएगी। शहरवासी अब पूछ रहे हैं

क्या प्रशासन सचमुच सो रहा है या फिर जनता को इस शोर की आदत डाल देने की नीति पर काम हो रहा है?सवाल बड़ा है और जवाब की प्रतीक्षा भी—क्योंकि अब हर चौक, हर मोड़ पर उठती आवाज़ कह रही है: “अब बस बहुत हुआ!”

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