बिना वीजा भारत में रहने का कोई हक नहीं: हाईकोर्ट

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने अफगानी युवक की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके तहत युवक ने वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध ठहराव के आरोप में भारत से लीव इंडिया नोटिस को चुनौती दी थी। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले में कहा है कि बिना वीजा भारत में रहने का कोई हक आवेदक को नहीं है।

दरअसल अफगानी युवक सैयद राशिद वर्ष 2019 में वीजा पर भारत आया था और भोपाल के एक निजी विश्वविद्यालय में रहकर एमए की पढ़ाई कर रहा था। कोरोना काल और महामारी के कारण उसे वीजा विस्तार मिला और 2022 में उसने कोर्स पूरा भी कर लिया। इसके साथ ही सैयद राशिद ने छात्र वीजा रहते हुए विश्वविद्यालय में नौकरी भी शुरू कर दी, जबकि उसका रोजगार वीजा कभी स्वीकृत नहीं हुआ था। सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अफगानी युवक का वीजा 24 मार्च 2024 तक बढ़ाया लेकिन उसके बाद भी याचिकाकर्ता भारत में बना रहा। भोपाल के डिप्टी कमिश्नर ने 8 जनवरी 2025 को आवेदक को लीव इंडिया नोटिस भेजकर एफआईआर दर्ज कराई, जिसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि यूएनएचसीआर से शरणार्थी का दर्जा मिलना भारतीय वीजा कानून से छूट नहीं देता और बिना वैध वीजा भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं बनता। न्यायालय ने कहा कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रुकना विदेशी अधिनियम 1946 की धारा-14 का उल्लंघन है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जारी लीव इंडिया नोटिस और एफआईआर की कार्रवाई पूरी तरह वैध है। उक्त मत के साथ न्यायालय ने दायर याचिका खारिज कर दी।

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