ब्यावरा: ब्यावरा-सुठालिया मार्ग पर घुरेल स्थित भगवान पशुपतिनाथ मंदिर धाम में माँ हिंगलाज का अति प्राचीन मंदिर है. सदियों से यहाँ माँ हिंगलाज विराजमान हैं और अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बरसाती रही हैं. यह स्थान भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.जानकारी के अनुसार, भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के नीचे की ओर स्थित गुफा में माँ हिंगलाज की प्रतिमा है. यह स्थान पूर्व में योगियों का मठ और तपोभूमि रहा है. मंदिर के पुजारी बद्रीनाथ महाराज के अनुसार मठ के अंतिम योगी बाबा सुजाननाथजी ने यहीं जीवित समाधि ली थी.
मान्यता है कि घुरेल में विराजमान माँ हिंगलाज के यहां की गई मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं. श्रद्धालु मनोकामना करते समय उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर इसे सीधा करते हैं. मंदिर में लगातार जोत प्रज्जवलित रहती है और भंडारे एवं प्रसादी वितरण के आयोजन नियमित रूप से होते रहते हैं.इतिहास में बताया जाता है कि वर्ष 1711 से पूर्व यह स्थान योगियों की साधना स्थली था. उसी समय यहाँ मठ पर कुछ विद्यार्मियों ने आक्रमण कर मंदिर को नुकसान पहुँचाया था. इसके बावजूद माँ हिंगलाज का यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीनता और श्रद्धा के लिए प्रसिद्ध है.
