अपनत्व, अनुशासन और अध्यनशीलता की त्रिवेणी रहे शालिगराम

शाजापुर: जिनके विचारों में देश प्रथम, सेवा प्रथम, समाज प्रथम, समाज में संस्कृति प्रथम, राजनीति में सुचिता, स्वच्छ छवि के नेता की कल्पना रही, ऐसे शाजापुर जिले के पोलायकलां जैसे छोटे गांव में शालिगराम जी तोमर का जन्म हुआ. बाल्यकाल से ही स्व्यंसेवक के रूप में काम किया. आजीवन सामाजिक कार्यो में लगे रहे और विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के रूप में युवाओं को संस्कार से बांध रखा. विद्या के क्षेत्र में युवाओं को भारतीयता से ओतप्रोत करके युवा नेतृत्व विकसित कराने में उनके अवदान को विस्मृत नहीं किया जा सकता है.

गौरतलब है कि शालिगराम तोमर ऐसे गुरू थे कि उनके शिष्य मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और संगठन में बड़े पदों पर आज भी विराजित हैं. आपातकाल का विरोध करने के कारण उनके विरूद्व गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया, लेकिन वे भूमिगत रहकर मीसाबंदियों के परिजनों की मदद करते रहे. विद्यार्थी परिषद को मजबूती, विद्यार्थी परिषद में युवाओं को भारतमाता के प्रति जागरूक करना यह शालिगरामजी की देन थी. विद्यार्थी परिषद के लिए वे किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं थे. 26 नवंबर 2010 को शालिगरामजी का निधन हुआ, लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के जहन में है. अपनत्व, अनुशासन और अध्यनशीलता की त्रिवेणी शालिगराम युवाओं को प्रेरित करते रहे.
कोई भी नेता शालिगराम जी को याद किए बिना नहीं रहता
शाजापुर जिले में भाजपा का कोई भी बडा नेता, मंत्री आया है तो वह सबसे पहले शालिगरामजी को याद करता है. उनके अनुशासन को याद करके भावुक होता है. चाहे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान हो या वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हो, पिछले दिनों डॉ. यादव शालिगरामजी तोमर के घर गए और उनके परिजनों से मुलाकात की. कभी भी शालिगरामजी ने अपने परिवार के लिए कुछ नहीं मांगा. उन्होंने समाज की उन्नति ओर विकास के लिए युवा पीढ़ी की ऐसी पौध तैयार की है जो प्रदेश का नेतृत्व कर रही है

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