इंदौर: सोशल मीडिया पर स्टॉक ट्रेडिंग का सपना दिखाकर शहर के रिटायर्ड जनरल मैनेजर से डेढ़ करोड़ रुपए ठगने वाले गैंग का इंदौर साइबर सेल ने भंडाफोड़ किया है. गिरोह के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े मिले हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें एलएलबी, साइबर लॉ, बीबीए और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र भी शामिल हैं. ठगों के जरिए भेजी गई रकम का बड़ा हिस्सा चाइनीज ग्रुपों तक पहुंचाया.
आवेदक फेसबुक पर आए स्टॉक ट्रेडिंग विज्ञापन से एक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ा. वहां उसे 490 फीसदी मुनाफे का लालच दिया. ओटीसी ट्रेडिंग, आईपीओ ट्रेड और ब्लॉक ट्रेडिंग के नाम पर एक माह में आवेदक से 1.39 करोड़ 60 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए. यह रकम महाराष्ट्र के बंधन बैंक खाते में भेजी गई, जहां से आरोपी अपने हिस्से का कमीशन निकालकर बाकी रकम चाइनीज लोगों के क्रिप्टो अकाउंट में ट्रांसफर कर देते थे.
इंदौर साइबर सेल की टीम ने खातेधारक विजय शंकर द्विवेदी को पकड़कर पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि उसने कमीशन के लालच में खाता और एटीएम आरोपी गिरोह को सौंप रखा था. आगे की जांच में सामने आया कि लखनऊ जेल में बंद 8 आरोपी इस नेटवर्क से जुड़े हैं. प्रोडक्शन वारंट पर उन्हें इंदौर लाकर रिमांड पर पूछताछ की गई, जिसमें गिरोह की कार्यप्रणाली का राजफाश हुआ. गिरफ्तार आरोपियों में दीवाकर विक्रमसिंह बीसीए छात्र, विनोद कुमार बीबीए छात्र, कृष शुक्ला एलएलबी छात्र, मोहम्मद शाद सिविल इंजीनियर, सक्षम तिवारी सीएस छात्र, सत्यम तिवारी साइबर लॉ डिप्लोमा, लईक अहमद कंस्ट्रक्शन वर्कर और मनीष जायसवाल 12वीं पास शामिल हैं.
जरूरतमंदों के खाते का करते थे इस्तेमाल
आरोपी जरूरतमंद लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनकी डिटेल्स व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप्स पर शेयर करते थे. इन्हीं खातों में ठगी के पैसे आते थे, जिन्हें आरोपी निकालकर चाइनीज वॉलेट्स में क्रिप्टोकरंसी के जरिए ट्रांसफर कर देते थे. मामले में साइबर सेल इंदौर ने अपराध दर्ज कर आरोपियों से गहन पूछताछ शुरू कर दी है. टीम का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक साइबर सेल और उप पुलिस अधीक्षक ने किया. कार्रवाई में निरीक्षक अंजू पटेल सहित पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
