नरसिंहगढ़। शासकीय संगीत महाविद्यालय नरसिंहगढ़ में संस्कृति संचालनालय के तत्वावधान में दो दिवसीय संगीत कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें जिले भर से आये संगीत से जुड़े विद्यार्थियों ने भाग लिया.
कार्यशाला दिनांक 24 एवं 25 सितंबर को आयोजित की गई. जिसमें 100 से 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया. कार्यशाला का विषय स्वर साधना एवं पारंपरिक बंदिशे रहा. आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. यश देवले ने विद्यार्थियों को रियाज का महत्व बताते हुए कहा कि निरंतर और अनुशासित साधना ही संगीत की आत्मा है. विद्यार्थियों को राग भैरव, खमाज, पूरिया धनश्री, आसावरी आदि रागो की पारंपरिक बंदिशों को सिखाया तथा रियाज से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की.
कार्यशाला में तबला संगत पवन माहौर और वायलिन संगत किरन कुमार बमनेरे ने द्वारा दी गई. आयोजन को लेकर विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखा गया. उन्होंने इसे अपने लिए काफी उपयोगी एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया.
