श्रीनगर। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने गुरुवार को कहा कि लेह में हिंसक झड़पें 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र के एकतरफा फैसले और उसके बाद राज्य का दर्जा देने के वादे को न निभाने का सीधा नतीजा है।
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुये हिंसक प्रदर्शनों में बुधवार को लेह में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन ने कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगा दिए हैं।
मीरवाइज ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “लद्दाख में प्रदर्शनों में लोगों की जान जाने से बहुत दुख हुआ। जम्मू-कश्मीर राज्य को बांटने और उसका दर्जा घटाने के एक तरफा फैसले और उसके बाद लोगों से किए गए वादों को न निभाने के ये बुरे नतीजे हैं। उम्मीद है कि लद्दाख के लोगों से किए गए वादों को पूरा किया जाएगा और जान बचाई जाएगी।”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कल ‘एक्स’ पर लिखा, “लद्दाख को राज्य का दर्जा देने का वादा भी नहीं किया गया था; उन्होंने 2019 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और वे धोखा महसूस कर रहे हैं और गुस्सा हैं। अब सोचिए कि हम जम्मू-कश्मीर में कैसे धोखा और निराश महसूस करते हैं, जब जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का वादा पूरा नहीं हुआ, जबकि हमने इसे लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी से इसकी मांग की है।”
लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर राज्य से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
