तीस हजार करोड़ रुपये से देश भर में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का जाल बिछाया जायेगा: शाह

नयी दिल्ली 03 जनवरी (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में देशभर में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का जाल बिछाया जायेगा जिसपर 30 हजार करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक देश के हर राज्य में फॉरेंसिक विश्वविद्यालय या केन्द्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला बनायी जायेगी।

श्री शाह ने शनिवार को अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के श्री विजय पुरम में मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का विषय सेंट्रल फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला था। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बंडी संजय कुमार, संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य, गृह सचिव, विश्वविद्यालय के कुलपति और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार और राज्य सरकारें देश भर में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का जाल बुनने के लिए अगले पांच साल में 30 हजार करोड़ रुपए निवेश किये जायेंगे। साथ ही राष्ट्रव्यापी मापदंडों की कमी को दूर करने के लिए एक वैज्ञानिक तंत्र तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वोत्तम और कमियों को साझा कर एक राष्ट्रव्यापी मापदंड निर्धारित किया जाएगा।

श्री शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 2019 से लेकर अब तक संसदीय परामर्शदात्री समिति की 12 बैठकें की हैं जिसके अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का विजन है कि आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद समय पर न्याय मिले। उन्होंने कहा कि सरकार 2029 तक ऐसी व्यवस्था बनायेगी जिसमें तीन साल की अवधि में प्राथमिकी से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्याय की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो सकेगी। उन्होंने कहा कि 2022 से अब तक हुए सुधार इसी दिशा में किए गए प्रयास हैं। गृह मंत्रालय इन प्रयासों की व्यापक निगरानी कर रहा है और कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि न्याय देने की प्रक्रिया के लिए फॉरेंसिक क्षमताओं में बढ़ोतरी और विस्तार के लिए सरकार ने 2020 से ही फॉरेंसिक्स पर ध्यान केन्द्रीत करके काम किया। उन्होंने कहा कि नई न्याय संहिताएं पिछले वर्ष जुलाई से अमल में हैं परंतु फॉरेंसिक्स की दृष्टि से इसे लागू करने का काम 2020 से ही शुरू कर दिया था, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।

श्री शाह ने कहा कि पहले देश के सामने पांच चुनौतियां थीं, जिनमें फॉरेंसिक जांच में प्रौद्योगिकी की कमी, साक्ष्य की गुणवत्ता का सीमित होना, कई जगहों पर पुलिस द्वारा फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट अदालत में नहीं देना, कुशल पेशेवरों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की कमी और राष्ट्रव्यापी मापदंडों की कमी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नए कानून के प्रावधानों के मुताबिक अब फॉरेंसिक प्रयोगशाला अपनी रिपोर्ट सीधी अदालत को भेजेगी और उसकी एक प्रति पुलिस को देगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गत नवंबर से देश के हर पुलिस स्टेशन को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम पर ऑनलाइन कर दिया गया है जिससे हर प्राथमिकी सेंट्रल सर्वर पर उपलब्ध है। अपराध की मैपिंग के लिए आने वाले दिनों में ‘माेडस ऑपरेन्डी ब्यूरो’ भी बनाया जाने वाला है। लगभग 36 करोड़ डाटा के साथ 7 लाख प्राथमिकी का डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है।

श्री शाह ने कहा कि अभी देश में 7 सीएफएसएल हैं जबकि 8 नयी प्रयोगशाला बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक कोई ऐसा राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ऐसा नहीं रहेगा जहां फॉरेंसिक विश्वविद्यालय या केन्द्रीय प्रयोगशाला में से कोई एक संस्था नहीं हो। उन्होंने कहा कि राज्यों की एफएसएल, फॉरेंसिक वैन और क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं को मज़बूत करने के लिए लगभग एक हज़ार करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान विभागों के मानकीकरण के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। ई-फॉरेंसिक्स के सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म की भी शुरुआत हो गई है और सीएफएसएल सहित 143 देश की प्रयोगशालाएं इससे जुड़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि 2029 तक एनएफएसयू में फॉरेंसिक के 35 हज़ार छात्र पढ़ रहे होंगे और 3 से 4 साल में हम इसे अधिकतम स्तर पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि 4 वर्षों में लगभग 16 हज़ार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का काम किया है और इस संख्या को अगले चार साल में लगभग तीन गुना तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

 

 

 

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