प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर सुनवाई टली, 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण (मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025) को चुनौती के मामले पर गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इस मामले में सरकार की ओर से अधिकृत सीनियर वकील सीएस वैद्यनाथन उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सुनवाई आगे बढ़ाने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर नियत की है। उल्लेखनीय है कि महाधिवक्ता के पूर्व में दिए मौखिक अंडरटेकिंग के चलते फिलहाल नई पॉलिसी से प्रमोशन रुके हुए हैं।

यह मामले भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर दायर किये गये है। याचिकाओं में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाई कोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाममात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। अजॉक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं। इनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ, रामेश्वर सिंह ठाकुर, आकाश चौधरी, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने सरकारी विभागों मे प्रतिनिधित्व के क्वांटिफाइबल डेटा प्रस्तुत किए। याचिकाओं में आरक्षण के विरोध वाले याचिकाकर्ताओं के प्रभावित होने वाले विधिक अधिकार पर प्रश्न उठाया। सभी मामलों पर अब एक साथ सुनवाई होगी। मामलें में विगत 16 सितम्बर को हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि जब पुरानी पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है तो नई पॉलिसी क्यों लाई गई। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा था कि यदि शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने कहा है तो यहां नए नियम के तहत क्यों प्रमोशन दिए जा रहे। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिकाएं यदि स्वीकार की जाती है या निरस्त होती हैं तो नए के तहत किए जाने वाले पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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