नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) अराकान आर्मी (एए) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल तुन म्यात नाइंग ने बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के कुछ अधिकारियों पर रोहिंग्या विद्रोही समूहों, अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) और रोहिंग्या सॉलिडैरिटी ऑर्गनाइजेशन (आरएसओ), को एए के ठिकानों पर हमले के लिए उकसाने का गंभीर आरोप लगाया है।
मेजर जनरल ने ‘द इरावाडी’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में खुलासा किया कि 18 सितंबर की रात उत्तरी रखाइन राज्य के माउंगडॉ टाउनशिप में एए के बेस पर एआरएसए और आरएसओ के लड़ाकों ने समन्वित हमला किया। उन्होंने दावा किया, “बांग्लादेशी सैन्य अधिकारियों ने सीमा पार से इन उग्रवादी समूहों को समर्थन दिया और उन्हें हमारे ठिकानों पर हमला करने का निर्देश दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “पहले मध्यस्थों के माध्यम से संपर्क होता था, लेकिन अब हमारे पास बांग्लादेशी अधिकारियों और उग्रवादी नेताओं के बीच सीधे समन्वय की पुख्ता खुफिया जानकारी है।”
मेजर जनरल के अनुसार, बांग्लादेशी अधिकारियों ने उग्रवादियों को ताउंगप्यो के पास या उसके उत्तर में एए के ठिकानों पर हमला करने का आदेश दिया, और उन्हें उपलब्ध किसी भी हथियार का उपयोग करने को कहा। यंगून स्थित बांग्लादेशी दूतावास ने इन आरोपों पर मंगलवार तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
द इरावाडी के अनुसार एए ने बुथिदाउंग और माउंगडॉ सहित रखाइन राज्य के अधिकांश हिस्सों पर कब्जा कर लिया है, जिसमें बांग्लादेश के साथ लगने वाली 271 किलोमीटर लंबी सीमा भी शामिल है।
एए ने 19 सितंबर को जारी एक बयान में कहा कि लंबी और असुरक्षित सीमा के कारण एआरएसए और आरएसओ के लड़ाकों को माउंगडॉ में घुसपैठ करने का मौका मिला। इन समूहों पर गैर-मुस्लिम स्थानीय लोगों का अपहरण, हत्या और फिरौती के लिए अपहरण करने जैसे अपराधों का आरोप है। इसके अलावा, वे गलत सूचना फैलाने में भी शामिल हैं।
मेजर जनरल तुन म्यात नाइंग ने कहा, “ये उग्रवादी रखाइन में प्रवेश करने के बाद जो भी दिखाई देता है, उसे मार देते हैं। फिर वे मृतकों पर एए की वर्दी या उपकरण डालकर सोशल मीडिया पर दावा करते हैं कि उनकी एए के साथ झड़प हुई, जबकि वास्तव में मारे गए लोग निर्दोष नागरिक थे।”

