राष्ट्रीय, 24 सितंबर (वार्ता) ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, औद्योगिक मशीनरी और कुछ मूल धातुओं के निर्यात में तेजी की बदौलत भारत की इंजीनियरिंग वस्तुओं में अगस्त में साल-दर-साल 4.91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि जुलाई की तुलना में इंजीनियरिंग निर्यात 5 प्रतिशत कम रहा।
देश के कुल वाणिज्यक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 28 प्रतिशत के दायरे में है।
भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) की एक विज्ञप्ति के अनुसार अगस्त में इंजीनियरिंग निर्यात 9.9 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष इसी महीने में यह 9.4 अरब डॉलर था। अगस्त में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के लिए अमेरिका शीर्ष बाजार बना रहा और अगस्त में वहां के लिए निर्यात 7.2 प्रतिशत बढ़कर 1.68 अरब डॉलर हो गया।
महीने-दर-महीने आधार पर, भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि जुलाई में इंजीनियरिंग निर्यात 10.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। अमेरिका में भारत के खिलाफ ऊंचे शुल्क में वृद्धि को देखते हुए, निर्यात में महीने-दर-महीने की यह गिरावट तनाव का एक प्रारंभिक संकेत माना जा सकता है।
भारत से अमेरिका को हर साल औसतन करीब 20 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग सामानों की आपूर्ति की जाती है। इस पर वहां 50 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाये जाने से निर्यात प्रभावित हुआ है।
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष, पंकज चड्ढा ने अगस्त के आंकड़ों पर कहा कि निर्यात बढ़ने से वृद्धि निर्यातक समुदाय उत्साहित हुआ है, क्योंकि उद्योग को महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंंकि अमेरिका ने जवाबी शुल्क और दंडात्मक शुल्क का संकट खड़ा कर दिया है तथा भू-राजनीतिक तनावों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, “इसलिए, यह निर्यातक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस कठिन समय में, ब्रिटेन के साथ हस्ताक्षरित एफटीए उद्योग के लिए एक बड़ा लाभ साबित होगा क्योंकि यह ब्रिटेन के बाजार में हमारी उपस्थिति को और मजबूत करेगा।”
श्री चड्ढा ने आगे कहा, “भारत यूरोपीय संघ के साथ एक और एफटीए पर बातचीत कर रहा है, हमें उम्मीद है कि यह गैर-टैरिफ बाधाओं, जैसे कि सीबीएएम, को दूर करेगा और एफटीए को वास्तव में प्रभावी बनाएगा। इसके अतिरिक्त, हम सरकार से विदेशों में भारतीय उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए हमें सहायता प्रदान करने का आग्रह करते हैं, क्योंकि उत्पादों और गंतव्यों का विविधीकरण महत्वपूर्ण है। निर्यात ऋण, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बढ़ती रसद लागत जैसे मुद्दों के समाधान के लिए सरकार का समर्थन भी महत्वपूर्ण होगा।”
भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात के प्रमुख बाजारों में, जिनमें अगस्त 2025 के दौरान सकारात्मक वृद्धि देखी गई, ब्रिटेन, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, इटली, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, फ्रांस और नीदरलैंड शामिल थे।
इस साल अगस्त में चीन को इंजीनियरिंग निर्यात 7.4 प्रतिशत घटकर 24.25 करोड़ डॉलर रहा जबकि तुर्की को होने वाले निर्यात में 42.3 प्रतिशत की गिरावट देखी और यह घटकर 16.2 करोड़ डॉलर रह गया।
इसी दौरान इंडोनेशिया को निर्यात होने वाला निर्यात पिछले साल अगस्त के 30.17 करोड़ डॉलर की तुलना में 65.6 प्रतिशत गिरकर 10.36 करोड़ डॉलर रह गया। इसी तरह सिंगापुर और सऊदी अरब को इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में भी अगस्त 2025 में भारी गिरावट आई।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले पाँच महीनों के दौरान संचयी आधार पर इंजीनियरिंग निर्यात में साल-दर-साल 5.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 46.52 अरब डॉलर से बढ़कर इस साल 49.24 अरब रहा डॉलर हो गया।
देश के कुल वाणिज्यक वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों का हिस्सा जुलाई 2025 के 28 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2025 में 28.2 प्रतिशत हो गया। 2025-26 की अप्रैल-अप्रैल-अगस्त अवधि के दौरान संचयी आधार पर यह हिस्सा 26.74 प्रतिशत दर्ज किया गया।
अगस्त 2025 में इंजीनियरिंग उत्पादों के 34 वर्गों में से 27 में साल-दर-साल सकारात्मक वृद्धि देखी गई। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट निर्यात में मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई, जो इस साल अगस्त में साल-दर-साल 21 प्रतिशत बढ़कर 2.38 अरब डॉलर हो गया। निकिल एवं उत्पाद, विद्युत मशीनरी एवं उपकरण, विमान एवं अंतरिक्ष यान, जहाज एवं नौकाएँ, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण एवं हस्त औज़ार, तथा काटने के औज़ारों सहित इंजीनियरिंग पैनलों के निर्यात में अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2024 के दौरान गिरावट देखी गई।
भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में उत्तरी अमेरिका 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर रहा उसके बाद यूरोपीय संघ (18प्रतिशत) और पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र के बाजार ( वाना ) का (14 प्रतिशत) का स्थान रहा।

