
जबलपुर। सुबह से ही नर्मदा तटो में पितृ को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। पितृतर्पण करने वाले जातकों ने पूजा-अर्चना के बाद पितरों से क्षमा मांगी कि हमसे जो भी बना हमने आपके लिए किया, अब आप प्रस्थान कीजिए और अपना आशीष अपने परिवार पर बनाए रखिए। इस बार 7 सितंबर से पित्र पक्ष शुरू हुआ था। जो कल 21 सितंबर को समाप्त हुआ। 15 दिनों की मेहमानी कर पितर बिदा हुए।
महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार महर्षि निमि ने सबसे पहले श्राद्ध की शुरुआत की थी, ऐसा सनातन धर्म के मान्यताओं के अनुसार अत्रि मुनि में महर्षि निमि को श्राद्ध का उपदेश दिया था, उसके उपरांत ये परम्परा शुरू हुआ। पितृपक्ष पर नर्मदा मैया के प्रिय स्थल जिलहरी घाट में पंडित राम लला दुबे के यहां पूर्वजो के तर्पण के लिए भक्तों की जमघट लगा रहा। उन्होंने बताया कि भगवान से पहले पूर्वज पूजे जाते हैं, देव तर्पण ऋषि तर्पण, मुनि तर्पण, पूर्वजों का तर्पण, भीष्म पितामह तर्पण सूर्य भगवान को अर्ध्य देकर, प्रणाम करके क्षमा याचना की जाती है। जिससे पूर्वजों का आशीर्वाद वरदान स्वरूप समस्त परिवार को प्राप्त होता है।
