नयी दिल्ली 20 सितम्बर (वार्ता) भारत और यूनान की नौसेनाओं ने भूमध्य सागर में पहले द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं और रण कौशल का प्रदर्शन किया। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि गुरुवार को संपन्न अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल का शानदार उदाहरण है। दो चरणों में आयोजित अभ्यास का बंदरगाह चरण 13 से 17 सितंबर तक सलामीस नौसेना बेस पर समुद्री चरण 17 और 18 सितंबर तक हुआ । भारतीय नौसेना के गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद ने अभ्यास में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बंदरगाह चरण के दौरान दोनों नौसेनाओं के सैनिकों ने आपसी समझ और तालमेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई तरह की गतिविधियों में भाग लिया। प्रमुख कार्यक्रमों में संचालन संबंधी जानकारी साझा करने के लिए क्रॉस-डेक दौरे, चालक दल के बीच पेशेवर बातचीत और यूनानी नौसेना के एली श्रेणी के फ्रिगेट एचएस थेमिस्टोकल्स पर आयोजित एक प्री-सेल सम्मेलन शामिल थे। नौसैनिक पोत पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दौरान यूनान में भारत के राजदूत रुद्रेंद्र टंडन, सलामीस नौसेना बेस के कमांडर कमोडोर स्पाइरिडॉन मंटिस , यूनानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवार मौजूद थे। कार्यक्रम में भारत की समृद्ध परंपराओं के जरिये दोनों समुद्री सेनाओं के बीच संबंधों को नया आयाम दिया गया। इसके अलावा नौसैनिक पोत के चालक दल ने एक्रोपोलिस की पवित्र चट्टान का दौरा किया।
समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं की इकाइयों के बीच जटिल समुद्री युद्धाभ्यास और सामरिक अभ्यास हुए जिनमें रात्रिकालीन वीबीएसएस संचालन, समुद्र में पुनःपूर्ति प्रक्रियाएँ, संयुक्त पनडुब्बी रोधी युद्ध, समन्वित गन फायरिंग और अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए क्रॉस-डेक हेलीकॉप्टर संचालन शामिल थे। इन अभ्यासों ने न केवल दोनों नौसेनाओं के पेशेवर कौशल को प्रमाणित किया, बल्कि चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में संयुक्त रूप से संचालन करने की उनकी क्षमता को भी रेखांकित किया।
पहले द्विपक्षीय अभ्यास का सफल आयोजन समुद्री सुरक्षा और सहयोग के क्षेत्र में भारत और यूनान के बढ़ते सामंजस्य को दर्शाता है। वैश्विक समुद्री साझा क्षेत्रों में सुरक्षा, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में दोनों राष्ट्रों के हित समान हैं। इस अभ्यास ने सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, अंतर-संचालन क्षमता विकसित करने और दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर तालमेल बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
अभ्यास संपन्न होने के बाद आईएनएस त्रिकंद भूमध्य सागर में अपनी तैनाती के अगले चरण के लिए रवाना हुआ।

