नैनपुर: ब्रिटिश कालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण थांवर पुल आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल में बने इस पुल के मजबूत पिलर आज भी चट्टान की तरह खड़े हैं, लेकिन तेज बहाव और नए पुल की टेल से ऊपरी परत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। नए पुल के बनते ही इस ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी शुरू हो गई, जिससे इसकी स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यदि प्रशासन जनसहयोग और ठेकेदारों की मदद से पहल करे तो थांवर पुल का पुनः जीर्णोद्धार कर उसे पैदल आवागमन के लिए छोटे रपटा घाट की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल लोगों को पैदल चलने और टहलने का सुरक्षित मार्ग मिलेगा, बल्कि यह क्षेत्र के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर सकता है।
इतिहासकारों का कहना है कि यह पुल सिर्फ एक संरचना नहीं, बल्कि उस दौर की इंजीनियरिंग और शिल्पकला का जीवंत दस्तावेज है। इसका संरक्षण न केवल विरासत को बचाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपने अतीत से जोड़ने का अवसर देगा। स्थानीय प्रशासन यदि समय रहते पहल करे तो यह धरोहर आने वाले वर्षों तक क्षेत्र की शान बन सकती है।
