पारंपरिक रूप से निकली गोगावीर की सवारी

चंदेरी: ऐतिहासिक नगरी चंदेरी अपनी विभिन्न कलाकृतियों एवं पुरातत्व धरोहर के नाम से प्रसिद्ध है, वहीं सैकड़ों वर्षों से चली आ रही धार्मिक श्रद्धा और आस्था का प्रतीक गोगा वीर जाहरवीर की सवारी निकाली गई। जहां जहां से यह सवारी निकली वहां वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा। उल्लेखनीय है कि भादो पक्ष की परवा से मेला प्रारंभ हो जाता है। जहां व्यक्ति व्रत उपवास रखते हैं, और अपने तन व मन को भक्ति में समाहित कर लेते है।

पहले दिन गोगा वीर की मणि में समस्त लोग एकत्रित होकर पूजन अर्चना करते है। उन्होंने बताया कि पूजन अर्चना करने में बड़े-बड़े नगाड़े और ढाको के साथ पूजन अर्चना प्रारंभ होती है और यह कार्यक्रम प्रथम दिवस से लेकर जन्माष्टमी तक रात्रि कालीन बेला में ही चलता है। वहीं नवमी के दिन सवारियां निकाली जाती है। जो नगर के विभिन्न मार्गों से जगह-जगह स्थानों पर पूजन अर्चना करते हुए खिड़की दरवाजे पर पहुंचता है, जहां पर पूजन अर्चना होती है और इसके बाद वहां से एक और नए रूप में मरघट देवता का आगमन होता है।

जिसको को वहां से लोगों द्वारा अपने कंधों पर ले जाया जाता है और कुछ दूरी पहुंचने के बाद कन्या शाला स्कूल के समीप उनको लिटा दिया जाता है जहां पर मंत्रों द्वारा उन देवता की पूजन अर्चन कर के जिस व्यक्ति के ऊपर वह देवता आते हैं उस व्यक्ति को मंत्रों द्वारा जगाया जाता है। इसके पक्षात मेला आगे बढ़‌ता है और गंगा दासी स्थान पहुंचता है जहां पर देवताओं को स्नान कराया जाता है और फिर मेला बेटों की नाए में पहुंचता है जहां पर भैसासुर नामक देवता का स्थान है, यहां पर लोगों की फरियादओं को सुना जाता है और जिन लोगों की फरियाद पूरी हो जाती हैं उनके द्वारा बहां पर पूजन अर्चना की जाती है।

करीब 2 से 3 घंटे पूजन अर्चना का दौर चलता है, इसके बाद मेला आगे बढ़‌ता है और बोर्ड कॉलोनी के समीप कपूरिया नामक स्थान पर यह मेले का विराम होता है। इस मेले में कहीं से कोई परेशानी और दिकत ना हो इसके लिए पुलिस प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। पुलिस प्रशासन के अलावा एसडीएम तहसीलदार एवं सुरक्षा बल बुलाया जाता है और मेले को भक्ति भाव एवं सद्भावना से लोग बाग बड़े ही धूमधाम तरीके से निकालते हैं

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