ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
सिर्फ ग्वालियर चंबल अंचल ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर भाजपा की राजनीति को निर्देशित, नियंत्रित कर भविष्य की रणनीति और नियति को तय करने की सामर्थ्य रखने वाले दो बड़े छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेन्द्र सिंह तोमर एक बार फिर आमने सामने हैं। अब तो पार्टी फोरम से परे जाकर सार्वजनिक मंचों पर भी इशारों और छद्म भाषा में एक दूसरे पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। चूंकि स्थानीय सांसद भारतसिंह नरेंद्र सिंह के कट्टर समर्थक हैं, लिहाजा अपने नेता के साथ ताल मिलाते हुए वे भी ग्वालियर महाराज को चुनौती देने वाले अंदाज में हैं।
ग्वालियर के इन दोनों सियासी खेमों की गुटबाजी तब और खुलकर सामने आ गई जब बीते रोज सिंधिया ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ग्वालियर के विकास से जुड़े मसलात पर बैठक लेकर अफसरों को दिशा निर्देश दिए। खास बात यह कि ग्वालियर के वर्तमान और भविष्य के प्रकल्पों पर मंथन के लिए बुलाए इस इज़लास में न तो स्थानीय सांसद भारतसिंह शरीक हुए और न उनके नेता नरेंद्र सिंह। भारत सिंह दिल्ली में थे तो नरेंद्र सिंह भोपाल में।
नरेंद्र सिंह के समर्थक इस बैठक की वैधानिकता एवं औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं। नरेंद्र के खास माने जाने वाले होटल कारोबारी सोनू मंगल ने तो साफ इल्जाम लगा दिया कि प्रभारी मंत्री की आड़ लेकर इस तरह की बैठकें की जा रही हैं। सोनू ने सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना शिवपुरी के विकास को लेकर भी सार्वजनिक रूप से कटाक्ष किए। सांसद भारत सिंह ने करीब छह महीने पहले सिंधिया द्वारा उनके संसदीय क्षेत्र से जुड़े मामलों में दखल देने की तोहमत लगाते हुए ऊपर तक नाराजगी जताई थी, तब से सिंधिया अपने दौरे में ग्वालियर आकर सीधे शिवपुरी गुना निकल जाते थे लेकिन छह महीने बाद सिंधिया ग्वालियर में अरबों की लागत से बन रही एलीवेटेड रोड और फाइवस्टार रेल्वे स्टेशन तक के बारे में अफसरों को ताईद कर रहे हैं। कलेक्ट्रेट की बैठक में सिंधिया नरेंद्र सिंह के नजदीकी माने जाने वाले एक बड़े नेता को कार्यक्रमों में गैरहाजिरी पर फटकार लगाने से भी नहीं चूके। क्या सिंधिया को ग्वालियर के मामलात में फ्रीहैंड मिल गया है !
*यूं ही नहीं उखड़े प्रद्युम्न और सिलावट
केबिनेट के बाद मंत्रियों के साथ सीएम की अनौपचारिक मीटिंग में प्रद्युम्न सिंह जिस तरह ग्वालियर की बदहाली के मुद्दे पर उखड़े और कलेक्टर से लेकर निगम कमिश्नर तक को आड़े हाथों लिया, प्रद्युम्न के इन गर्म तेवरों को जिस तरह तुलसी सिलावट का भी साथ मिला, उसके बाद माहौल गर्म हो उठा। चूंकि ये दोनों ही वरिष्ठ मंत्री सिंधिया के अनुयायी हैं, इसे देखते हुए सियासी हलकों में यही चर्चा है कि यह सब सिंधिया कैम्प की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है। पांच बरस पहले का वाक्या याद हो आया, जब कमलनाथ मुख्यमंत्री होते थे और प्रद्युम्न इसी तरह उखड़ गए थे।
इसके बाद सिंधिया फ्रंट पर खेले और कमलनाथ आउट हो गए लेकिन इस बार वैसी परिस्थितियाँ नहीं हैं। सिंधिया और सीएम के बीच अच्छा कॉर्डिनेशन है। संख्याबल के मामले में भी भाजपा विधायक दल इतना मजबूत है कि छोटे मोटे झंझावात झेलने में समर्थ है। दरअसल, विधायकी का चुनाव हराने वाले नेताओं सहित तमाम सिंधिया समर्थकों को निगम मंडलों में नियुक्ति का इंतजार है जो लंबा खिंचता जा रहा है। मलाईदार निगम बोर्डों पर सिंधिया खेमे का दावा है, ग्वालियर के तीनों प्राधिकरणों के लिए महल से पहले ही नाम दिए जा चुके हैं, जो मूल भाजपा के काउंटर के चलते यथार्थ में नहीं बदल पा रहे। यही कुछ वजहें हैं कि सिंधिया समर्थकों का बेइंतहा इंतजार अब बेसब्री में बदलता जा रहा है। हालांकि सिंधिया खेमे का कहना है कि उनका गुस्सा निगम बोर्ड नहीं बल्कि अपने नेता के गृहनगर की बदहाली पर है।
*लंबे इंतजार के बाद भगवा हुए कृष्णराव
तीन दफा पार्षद और नेता प्रतिपक्ष रहने के बाद कुछ महीने पहले तक कांग्रेसी महापौर के सलाहकार की भूमिका निभाने वाले कृष्णराव दीक्षित अन्ततः अपनी पार्टी को झटका देते हुए भगवा हो गए। उन्हें खुद सिंधिया ने भगवा पट्टिका पहनाकर भाजपा परिवार में शामिल किया। भाजपा ने उम्मीद लगाई है कि उनके आने से उपनगर ग्वालियर में लाभ होगा। प्रद्युम्न सिंह तोमर और अशोक शर्मा लंबे समय से उन्हें भाजपा में लाने की जुगत में थे।
कांग्रेस उन्हें पहले ही पार्टी से बाहर कर चुकी थी। दीक्षित चाहते थे कि वे उपनगर में समर्थकों सहित एक बड़ा जलसा कर सीएम मोहन यादव और सिंधिया के समक्ष अपना जनाधार दिखाकर भाजपा में शामिल हों लेकिन सीएम की व्यस्तताओं के चलते यह मुनासिब नहीं हुआ और वे सिंधिया के समक्ष अकेले ही भाजपा शरणम् गच्छामि हो गए। अब भाजपा में कांग्रेस से आए पूर्व नेता प्रतिपक्ष की संख्या तीन हो गई है, ये हैं सुधीर गुप्ता, केशव मांझी और कृष्णराव। ये सभी सिंधिया समर्थक हैं। खास बात यह कि मौजूदा नेता प्रतिपक्ष हरी पाल भी सिंधिया के साथ ही भाजपा में आए थे।
*गौसेवा, श्रमदान और प्रभातफेरी की ट्रेनिंग लेंगे नए मुखिया
ग्वालियर चंबल क्षेत्र के कांग्रेस जिलाध्यक्ष जल्द ही प्रभातफेरी निकालते, श्रमदान करते और गौसेवा करते नजर आएंगे। पार्टी ने इन नवागत अध्यक्षों को राजनीतिक गुण सिखाने और विचारधारा से वाकिफ कराने दस दिन के आवासीय प्रशिक्षण कैम्प में भेजने की तैयारी कर ली है। इन्हें ट्रेनिंग देने आचार्य विनोबा भावे की भूमि वर्धा के एक गांधीवादी एनजीओ को हायर किया गया है।
