नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का त्यागपत्र राष्ट्रपति ने स्वीकारा

काठमांडू, 09 सितंबर (वार्ता) नेपाल में राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। श्
श्री ओली ने देश में जारी उग्र प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को देखते हुए इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा, “देश में व्याप्त असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए और संवैधानिक राजनीतिक समाधान और समस्या के हल की दिशा में आगे के प्रयासों को सुविधाजनक बनाने के लिए, मैं तत्काल प्रभाव से प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देता हूं।”
श्री ओली ने 15 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला था। इससे पहले भी वह अक्टूबर 2015 से अगस्त 2016 और फरवरी 2018 से जुलाई 2021 तक पद पर रह चुके थे। बतौर प्रधानमंत्री यह उनका चौथा कार्यकाल था।
उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के शक्ति परीक्षण के दौरान प्रतिनिधि सभा का विश्वास हासिल करने में विफल रहने के बाद राष्ट्रपति ने नयी सरकार बनाने के लिए बुलाया था। श्री ओली ने अपने समर्थन में 166 सांसदों के हस्ताक्षर प्रस्तुत किए थे। कुल 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 138 सदस्यों की आवश्यकता होती है। इनमें नेपाली कांग्रेस के 88 और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी – यूनाइटेड मार्क्सवादी-लेनिनवादी ( यूएमएल) के 78 सदस्य थे।
उन्होंने भारत के साथ नेपाल के पारंपरिक रूप से घनिष्ठ व्यापारिक संबंधों के विकल्प के रूप में चीन के साथ संबंधों को मजबूत किया।
देश में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सोमवार को कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। प्रदर्शनकारी कई स्थानों पर उग्र हो गए और उन्होंने आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव किया। पुलिस की कार्रवाई में कल 20 लोगों की मौत हो गई थी और 350 लोग घायल हो गए थे।
इससे पहले गृहमंत्री रमेश लेखक ने सोमवार को गोलीबारी की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके अलावा तीन और मंत्रियों ने आज पद से इस्तीफा दे दिया था। श्री ओली ने आज सुबह घोषणा की थी कि शाम को सर्वदलीय बैठक बुलाई जायेगी।
प्रदर्शनकारी श्री ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर आज सड़कों पर उतर आये थे। इसके बाद श्री ओली ने इस्तीफा दे दिया।
प्रदर्शन का सिलसिला आज भी जारी है और बड़ी संख्या में लोग संसद भवन में घुस गए और आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निजी आवासों को भी निशाना बनाया और आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय को भी नहीं बख्शा और वहां भी तोड़फोड़ की गई।

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