मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
आदिवासी कांग्रेस नेता व विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विगत दिनों दिए आदिवासी हिंदू नहीं बयान ने तूल पकड़ लिया है. अंचल के आदिवासी नेता उनके विरोध में उतर आए, यहां तक तो उन्होंने भी सोचा होगा, पर अपने ही घर में घिर जाएंगे उन्हें उम्मीद नहीं थी. उनके विधान सभा क्षेत्र और गृह नगर गंधवानी में अचानक हवा का रुख बदला तथा क्षेत्र का हर आदिवासी सडक़ पर आ गया. सनातन काल से अपने-आप को हिंदू बताते हुए ये आदिवासी उमंग सिंघार से माफी मांगने की बात को लेकर अड़े हुए हैं.
सर्व आदिवासी समाज ने इस बयान के विरोध में रैली निकाली, जिसमें गांव-गांव, फालियों, पंचायतों से आदिवासी पहुंचे. प्रदर्शनकारियों ने सिंघार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन भी राष्ट्रपति के नाम प्रेषित किया. रैली की खास बात यह रही कि इसमें कई कांग्रेसी भी शामिल हुए. अपने ही गढ़ में ंिसघार को उनके अनुयायी समाज से कतई उम्मीद नहीं थी कि उनके बयान की खिलाफत में मोर्चा खोल देंगे. इसके पूर्व नेपानगर, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर, धार में सिंघार के विरोध में सुर फूटे थे, मगर वे भाजपाई थे. वर्षों से यह विधान सभा जीतते आ रहे सिंघार के लिए यह पहला मौका है जब उन्हें इतने बड़े पैमाने पर क्षेत्रवासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. अगर नहीं सम्हले तो आगे उनकी राजनीतिक जड़ें हिलने में देर नहीं लगेगी.
कृषि क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी
लोकहितकारी विकास तक के लिए लैंड पुलिंग नीति अच्छी है, कार्य जल्दी पूर्ण होंगे, मगर मालवा-निमाड़ की उपजाऊ सिंचित भूमि पर अगर धड़ल्ले से निजी टाउनशिप-कालोनियां बनने लगी तो यह यहां के कृषि क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है. अनउपजाऊ, पड़ती भूमि पर यह योजना ठीक है, पर उपजाऊ भूमि का उपयोग हुआ तो मुश्किल खड़ी हो सकती है. नई नीति के अनुसार किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति लैंड पुलिंग करके टाउनशिप बना सकेंगे.
जब यह साकार होंगी तो अंचल को इसकी बड़ी कीमत चुकाना पड़ सकती है. शीघ्र बड़ी राशि मिलने के चक्कर में किसान जमीन बेचेंगे, लेकिन उन्हें द्यान नहीं रहेगा कि पैसा कितनी जल्दी कहां खत्म हो जाता है, जबकि कृषि भूमि फसल से राशि नाममात्र मिले, फिर भी जीवन पर्यंत आजिवीका का साधन रहती है. यदि इस नीति में भरमार कालोनियां विकसीत होती रही तो एक समय ऐसा आएगा जब उपजाऊ भूमि के अभाव में अंचल अन्न संकट का सामना करेगा.
योजना सफल, पर सिर पर तलवार
उज्जैन में कांग्रेस सृजन अभियान सवालों के घेरे में है. कार्यकर्ताओं को लगता है कि रायशुमारी को दरकिनार कर उनके साथ खेला कर दिया. इसके लिए वे प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को जिम्मेदार मान रहे है. उनका मानना है कि जिलाध्यक्ष की नियुक्ति में एक खेमे को ही तवज्जो दी गई. हाल ही में आयोजित किसान न्याय यात्रा अंदर ही अंदक सुलग रहे इन कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई. उन्होंने अवसर भी ऐसा चुना कि राष्ट्रीय स्तर तक बात पहुंचे.
उज्जैन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और सचिन पायलट के नेतृत्व में किसान न्याय सभा हो रही थी, वहीं दूसरे खेमे के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी का पुतला फूंक दिया. विवाद की जड़ ग्रामीण जिला अध्यक्ष महेश परमार की नियुक्ति है, जिसे नाराज कार्यकर्ताओं ने मनमाना और सर्वे रिपोर्ट की अनदेखी बताया. इस घटना से मामला सुर्खियों में आ गया और उपर तक चर्चा मे रहा. कार्यकर्ताओं का नाराज खेमा अपनी योजना में सफल भले ही रहा, लेकिन अब उन पर अनुशासनहीनता की तलवार लटक रही है
