नई दिल्ली | संसद के 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र से ठीक एक दिन पहले, 15 अप्रैल को I.N.D.I.A. गठबंधन के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण बिल में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों पर साझा रुख अख्तियार करना है। कांग्रेस की कार्यसमिति (CWC) पहले ही इस मुद्दे पर चर्चा कर चुकी है और विपक्ष को संदेह है कि सरकार चुनावी राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस बिल में जल्दबाजी कर रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि जनगणना और परिसीमन (Delimitation) जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की उनकी मांग को सरकार ने सिरे से नजरअंदाज कर दिया है।
I.N.D.I.A. ब्लॉक के नेताओं का तर्क है कि जब चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, तब महिला आरक्षण जैसे बड़े कानून में बदलाव लाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है। समाजवादी पार्टी और टीएमसी जैसे दलों ने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि यह कानून 2029 से लागू होना है, तो सरकार मतदान के बीच में विशेष सत्र बुलाने की जिद क्यों कर रही है। विपक्ष को डर है कि सरकार परिसीमन के बहाने सीटों के समीकरणों में बदलाव कर सकती है, जिससे चुनावी राज्यों के नतीजों पर असर पड़ सके। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और सपा के जावेद अली खान ने इसे भाजपा की ‘हठधर्मिता’ करार देते हुए एकजुट विरोध की चेतावनी दी है।
संसद के इस तीन दिवसीय विशेष सत्र (16-18 अप्रैल) में महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी गर्मा सकता है। ऐसी खबरें हैं कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती है, जो कि एक अत्यंत संवेदनशील और नीतिगत विषय है। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी पहले ही महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दे रही है, इसलिए भाजपा की यह रणनीति वहां सफल नहीं होगी। 15 अप्रैल की बैठक में गठबंधन के नेता इस बात पर आम राय बनाएंगे कि सदन के भीतर सरकार को तथ्यों के साथ कैसे घेरा जाए। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

