सांसद सहित 272 किसानों का पुराना भुगतान अटका, नए उपार्जन की तैयारी शुरू

जबलपुर: जिले में आगामी धान उपार्जन को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है, जिसके पंजीयन भी प्रारंभ हो गए हैं। देखा जाए तो अभी तक जिले में विगत वर्ष किसानों द्वारा बेची गई धान का भुगतान नहीं हुआ है और जिला प्रशासन आगामी उपार्जन की तैयारी कर रहा है। जिससे भुगतान ना होने वाले किसानों के चेहरे पर अभी भी मायूसी छाई हुई है। उल्लेखनीय है कि धान उपार्जन के समय शुरू हुई अफरा तफरी के मामले में कई किसान ऐसे हैं, जिनको अभी तक उनकी फसल का पैसा नहीं मिला है, जिसके चलते वह 6 महीने से भुगतान के लिए भटक रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के 272 किसान ऐसे हैं, जिनका 5 करोड़ 17 लाख रुपए के भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। जिसके लिए प्रशासन द्वारा भी कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। विदित है कि जिले के खाड़ केंद्र क्रमांक 1, केंद्र क्रमांक 2 महाराजपुर, कटंगी और पनागर समिति में अनियमिताओं के चलते गई कर्मचारियों- अधिकारियों पर मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन इन्हीं समितियों में अपनी धान बेचने वाले 272 किसान आज भी अपने भुगतान के लिए परेशान है।हालांकि नवागत कलेक्टर ने विगत दिनों कलेक्ट्रेट में पत्रकारों से चर्चा कर किसानों के अटके हुए भुगतान को शीघ्र दिलवाने का प्रयास करने की बात कही है, अब देखना होगा कि नए धान उपार्जन से पहले पुरानी धान का पैसा किसानों को मिल पता है कि नहीं।
आरोपियों की संपत्ति को बेचकर होनी थी वसूली
इस पूरे मामले में सहकारिता विभाग को जिला प्रशासन द्वारा किसानों के भुगतान की जिम्मेदारी दी गई थी। जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि उक्त समितियां के कमीसन और प्रासंगिक व्यय की राशि काटकर किसानों को भुगतान किया जाएगा और इसकी वसूली आरोपियों की संपत्ति को बेचकर की जाएगी। यह सभी बातें पूरी तरह से हवा हवाई थी। लेकिन इसका फायदा पीड़ितों को नहीं मिला और पीड़ित आज भी अपने भुगतान के लिए परेशान है।
272 किसानों में सांसद भी शामिल
उल्लेखनीय है कि जिले के इन 272 किसानों में जबलपुर सांसद आशीष दुबे और उनके भतीजे भी शामिल हैं, जिनका 750 क्विंटल धान का भुगतान अटका हुआ है ऐसे में लापरवाही का स्तर समझा जा सकता है। अब सवाल उठता है कि प्रशासनिक अधिकारी तात्कालिक रूप से आरोपियों के खिलाफ मुकदमे तो दर्ज कर देते हैं, लेकिन कोई समाधान होते नजर नहीं आ रहा है। कुछ दिनों के बाद आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते हैं और उनका वही खेल दोबारा शुरू हो जाता है,लेकिन किसान अपने भुगतान के लिए परेशान रहता है।

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