एआई का विकास हो सदैव मानवता की सेवा के लिए : बिरला

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि एआई का विकास सदैव मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए और इसे कभी भी मनुष्यों पर नियंत्रण का साधन नहीं बनने देना चाहिए।

श्री बिरला ने हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘फेथ एंड फ्यूचर : इंटिग्रेटिंग एआई विथ स्प्रिचुअलिटी’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करने के बाद कहा कि एआई का विकास सदैव मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए, इसे कभी भी मनुष्यों पर नियंत्रण का साधन नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म व समाज सेवा से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने धर्म व विज्ञान की वह व्याख्या दी, जो युवाओं को भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित शिक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानवीय अनुभवों को समृद्ध और बेहतर बनाना है, उसका स्थान लेना नहीं। एआई को हमेशा आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक जिम्मेदारी से संचालित होना चाहिए, तभी यह समाज के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। एआई के प्रयोग में चुनौतियाँ जरूर है लेकिन इन्हीं चुनौतियों में समाधान भी है। हमें पूरी सामर्थ्य है उसे खोजने की आवश्यकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा ही भारत की ताकत ही नैतिकता और सत्यता है। यही नैतिकता विश्व तक जानी चाहिए। भारत की ज्ञान परंपरा को दुनिया तक पहूँचाने के लिए भी हम एआई को माध्यम बना सकते हैं। एआई जैसी महान शक्तियों को विवेक और धैर्य से संतुलित करना आवश्यक है ताकि अमृत रूपी सकारात्मक परिणाम मिल सकें।

उन्होंने कहा कि करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्य ही एआई और आध्यात्मिकता के संगम को सही दिशा देंगे और यही न्यायपूर्ण भविष्य का आधार होंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई क्रांतिकारी बदलाव का माध्यम बन सकता है और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर कर सकता है।

श्री बिरला ने कहा कि भारत के प्राचीन आदर्श ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ हमें यह सिखाते हैं कि एआई का विकास समावेशी और न्यायपूर्ण होना चाहिए ताकि समस्त मानवता इसका लाभ उठा सके। इसमें समाज कल्याण का भाव होना चाहिए। यह सम्मेलन आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीकी प्रगति के बीच सार्थक संवाद की शुरुआत करेगा और मानवता को करुणामय भविष्य की ओर ले जाएगा।

 

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