मिसाल : दंपत्ति ने धर्ममार्ग अपनाकर की भागवत कथाओं की श्रृंखला, दान में दी संपत्ति

बागली। अब तक जैन आचार्यों के त्याग और धर्ममार्ग की कहानियाँ सुनने को मिलती रही हैं, किंतु सनातन धर्म में भी ऐसे व्यक्तित्व मौजूद हैं, जो जीवन के हर पड़ाव पर धार्मिक संस्कारों को निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है उदय नगर के निकट पोला खाल निवासी दिवंगत सतनारायण एवं इंदिराबाई की संतान नरेंद्र सारंडा और उनकी पत्नी मंजू सारंडा ने।

शारडा दंपति ने अपनी 58 वर्ष की जीवन यात्रा में धर्म और सेवा को ही अपना पथ बनाया। अब तक वे लाखों रुपए खर्च कर चार अलग-अलग स्थानों पर भागवत कथाओं का आयोजन करा चुके हैं। पहली कथा अयोध्या की राम जन्मभूमि में, दूसरी मनकामेश्वरी नर्मदा मंदिर पिपरी में, तीसरी फिर से अयोध्या में तथा चौथी कथा उदय नगर के हनुमान मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। कथा के दौरान ‘नानी बाई का मेरा’ धार्मिक मंचन भी कराया गया।

धर्म मार्ग पर चलते हुए दंपति ने गरीब ब्राह्मण कन्या का विवाह भी पूर्ण रीति-रिवाज से कराया और हाल ही में अपनी निजी अचल संपत्तिपोला खाल स्थित मकान

मंदिर समिति को दान कर दिया। कथा स्थल पर बोल बम कांवड़ यात्रा संयोजक गिरधर गुप्ता ने दंपति का सम्मान करते हुए इसे सनातन धर्म की सच्ची शक्ति बताया। इस अवसर पर कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और दानदाता दंपति का अभिनंदन किया। समिति ने कथावाचक नारायण प्रसाद शास्त्री का भी शाल-श्रीफल से सम्मान किया।

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