गले में तुलसी और माथे पर तिलक भगवान को प्रिय: राधेश्याम महाराज

*दंदरौआ धाम शताब्दीपुरम में श्रीमद् भागवत कथा का छठवां दिन*

ग्वालियर। गले में तुलसी धारण करने और माथे पर तिलक लगाने वाले की कभी अधोगति नहीं होती। जिसके गले में तुलसी की माला होती है, भगवान उसे कभी अस्वीकार नहीं करते हैं। ऐसे लोग सदा भगवान के धाम को जाते हैं। तुलसी धारण करने वाले को स्नान करते वक्त हर रोज सारे तीर्थ का फल मिलता है। यह विचार पं. राधेश्याम महाराज ने दंदरौआ धाम शताब्दीपुरम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस शनिवार को व्यक्त किए। इस अवसर पर माता रुक्मणी और भगवान कृष्ण के विवाह का उत्सव मनाया गया।

महाराज ने कहा कि शराबी और जुआरी भी यदि तुलसी धारण कर संकल्प कर लें तो उन्हें भी भगवान स्वीकार कर लेते हैं। गुरु की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि परंपरा का सिद्ध किया हुआ गुरु दीक्षा मंत्र यदि कानों में जाता है तो जन्म जन्म के कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने पूतना के बारे में बताया कि वह 18 किलोमीटर लंबी काजल के पहाड़ जैसी थी। भगवान श्रीकृष्णा उसके ऊपर नीलमणि से नजर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि नंद बाबा के 9 लाख गाय थी, जिनके दुग्ध का सेवन करने वाले कभी बूढ़े नहीं होते थे और सदा बलवान रहते थे। उन्होंने कहा कि गाय रहेगी तो प्रकृति हरी भरी रहेगी। पृथ्वी का आहार गोबर और गोमूत्र है। पृथ्वी को यदि आहार शुद्ध नहीं मिलेगा तो मनुष्य को अन्य कैसे शुद्ध मिलेगा। सिर्फ एक महीने तक घर में गाय रखने से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। गौ सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। गाय का गोबर चर्म रोगों को दूर कर देता है। इस अवसर पर कथा परीक्षित साधना राजीव कोठारी, जीडी नागर, भास्कर शर्मा, सागर नाती, मीना चौरसिया, संदीप रावत सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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