
नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को इस्पात उद्योग से स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील करते हुये सरकार की तरफ से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
श्री गोयल ने यहां इंडियन स्टील एसोसिएशन के छठे स्टील अधिवेशन को संबोधित करते हुये याद दिलाया कि एक समय था जब इस्पात उद्योग ने लागत में मामूली बचत के लिए मेट कोक (ब्लास्ट फर्नेस में इस्तेमाल होने वाला उच्च गुणवत्ता वाला कोयला) आयात करने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि इससे आयात पर निर्भरता बढ़ती है और घरेलू उत्पादन हतोत्साहित होता है। उन्होंने साफ कहा कि इस्पात उद्योग का यह रवैया अनुचित था और ऐसा व्यवहार रहने पर दूसरे उद्योग भी भविष्य में उसके साथ खड़े नहीं होंगे।
उन्होंने इस्पात उद्योग से अपने कच्चे माल की खरीद में स्वदेशी अपनाने और देश की हर तरह की इस्पात जरूरतों को पूरा करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील करते हुये कहा, “मैं आपसे सर्वश्रेष्ठ (इस्पात) बनाने की अपील करता हूं, लेकिन साथ ही स्वदेशी हमारा आदर्श और आत्मनिर्भर भारत हमारा मिशन होना चाहिये। आत्मनिर्भर भारत स्वदेशी यात्रा दूसरे देशों पर निर्भर यात्रा से कहीं अधिक बेहतर होगी। ”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति इस्पात खपत विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है, इसे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने इस्पात उद्योग से इमारत निर्माण में सीमेंट की जगह पहले से तैयार ढांचे के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के विकल्प तलाशने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जहाजरानी क्षेत्र में कनटेनर के लिए देश पूरी तरह आयात पर निर्भर है। इसलिए, इस्पात उद्योग को कंटेनर निर्माण के लिए जरूरी विशेष इस्पात का उत्पादन शुरू करना चाहिये, ताकि देश में ही कनटेनर बन सकें। उन्होंने अगले एक-दो साल में 50 करोड़ टन इस्पात निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम करने की अपील की।
श्री गोयल ने भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय इस्पात उद्योग को बेहतरीन लौह अयस्क उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस उद्योग की पूरी मदद करेगी।
