नयी दिल्ली, (वार्ता) मानसून ने गुरुवार को दिल्ली में दस्तक दे दी। सामान्य तौर पर यह 27 जून को दिल्ली में पहुंचता है, लेकिन इस बार पांच दिन की देरी से पहुंचा, हालांकि सुबह से ही शहर के विभिन्न हिस्सों में हुई बारिश से अंततः लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून पांच दिन की देरी से आज राष्ट्रीय राजधानी पहुंच गया है। दिल्ली पहुंचने से पहले मानसून ने लगभग एक महीने का सफर तय किया। दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं ने सबसे पहले चार जून को केरल में दस्तक दी थी, जो अपने सामान्य आगमन (01 जून) से तीन दिन देरी से पहुंचा था।
मौसम अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में जुलाई के महीने में मानसून का आना कोई असाधारण बात नहीं है। 21वीं सदी की शुरुआत से लेकर अब तक, 50 प्रतिशत से अधिक मामलों में मानसून जून की समय-सीमा को पार कर जुलाई में ही आया है। इससे पहले, साल 2021 में मानसून तय समय से 15 दिन की देरी से 13 जुलाई को आया था। वहीं, दिल्ली में मानसून की सबसे ज्यादा देरी साल 2002 में दर्ज की गई थी, जब मानसूनी हवाएं सामान्य तारीख से करीब तीन हफ्ते बाद 19 जुलाई को दिल्ली पहुंची थीं।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, सुबह के समय पूरी दिल्ली में हल्की बारिश दर्ज की गयी। महरौली (5.5 मिमी), आयानगर (5.0 मिमी), सफदरजंग (4.6 मिमी), लोधी रोड (4.1 मिमी), झडौदा कलां (4 मिमी), मयूर विहार (3.5 मिमी), रिज (3.0 मिमी) और दिल्ली विश्वविद्यालय (3.0 मिमी) में हल्की श्रेणी की बारिश दर्ज की गयी। वहीं, तुकमीरपुर (20.0 मिमी) और छतरपुर (18.5 मिमी) स्टेशनों पर मध्यम बारिश दर्ज की गयी, जो बीती रात से लेकर अब तक दिल्ली में सबसे अधिक है।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आज दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात के कुछ और हिस्सों, उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों, पूरी दिल्ली, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा और पंजाब तथा राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।
विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों के दौरान मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।
विभाग के दोपहर के बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है, जिसके कारण अगले पांच दिनों के दौरान देश के मध्य हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां काफी सक्रिय रहेंगी।
मौसम विभाग ने शुक्रवार से दक्षिण गुजरात क्षेत्र, कोंकण, सौराष्ट्र और कच्छ, पश्चिमी मध्य प्रदेश, ओडिशा और मध्य महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जतायी है।
