मुंबई, 06 सितंबर (वार्ता) मुंबई पुलिस ने शनिवार को पहली बार गणपति विसर्जन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और जुलूसों की निगरानी के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया।
पुलिस आयुक्त कार्यालय में एक एआई-आधारित नियंत्रण कक्ष कार्यरत है जो क्यूआर कोड का उपयोग करके प्रमुख गणपति प्रतिमाओं की वास्तविक समय में आवाजाही पर नज़र रखता है और भीड़ के आकार, मार्ग परिवर्तन या संभावित व्यवधानों का पता लगाता है। निगरानी प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक घोषणाओं के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही, जुलूस मार्गों पर लगाए गए लगभग 10 हजार सीसीटीवी कैमरे और अतिरिक्त कैमरे निगरानी बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
संयुक्त कानून एवं व्यवस्था आयुक्त सत्य नारायण ने कहा, “सुरक्षा व्यवस्था के लिए शहर भर में लगभग 25,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का समर्थन प्राप्त है। ड्रोन हवाई भीड़ निगरानी, प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक घोषणाओं में सहायता करते हैं।”
एक अधिकारी ने बताया कि एआई के ज़रिए पुलिस जुलूस के वर्तमान स्थान, भीड़ में लोगों की संख्या, तय किए गए रास्ते और कहीं कोई अनिर्धारित पड़ाव तो नहीं है, इसकी जानकारी प्राप्त कर रही है। इससे पता चलता है कि विभिन्न स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के बाद यातायात और भीड़ प्रबंधन में समस्या आ रही है।
उन्होंने कहा कि विसर्जन जुलूस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों को आकर्षित करते हैं, जिससे पैदल और वाहनों का यातायात बढ़ जाता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, दक्षिण मुंबई, मध्य क्षेत्रों और पूर्वी उपनगरों में यातायात में बदलाव और प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने कहा “ आईए के इस्तेमाल से हमें स्थिति पर नज़र रखने में मदद मिली है। लालबागचा राजा जैसे प्रमुख मंडलों से गणपति की मूर्तियाँ ले जाने वाले वाहनों पर एक क्यूआर कोड लगाया गया है, जिसका उपयोग जुलूस की वास्तविक समय में निगरानी के लिए किया जा रहा है।”
मुंबई में समुद्र तटों, कृत्रिम झीलों और अन्य जलाशयों सहित विभिन्न स्थानों पर 6,500 से ज़्यादा सामुदायिक गणेश मूर्तियों और 1.75 लाख घरेलू मूर्तियों का विसर्जन के मद्देनजर पुलिस ने नागरिकों से अधिकारियों के साथ सहयोग करने और सार्वजनिक देरी से बचने के लिए जहाँ भी संभव हो परिवहन करें।
