मंडला: नगरीय निकाय मंडला की ग्रीन बेल्ट जमीन भी अब सुरक्षित नहीं बची है। आरोप है कि नपा ने यहां खड़े दशकों पुराने विशाल पेड़ों को काट डाला और पुराने फव्वारे को तोड़ दिया। अब बाउंड्रीवाल तोड़कर करोड़ों की लागत से दुकानों का निर्माण और अमृत 2.0 के तहत पेयजल टंकी बनाने की तैयारी चल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ नियमों के खिलाफ है।
ग्रीन बेल्ट संरक्षित भूमि होती है, जहां किसी भी तरह का विकास या निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नपा ने मनमानी करते हुए निर्माण की राह पकड़ ली है।शहर के 24 वार्डों में केवल दो पार्क हैं, वह भी पौधों और झाड़ियों तक सीमित हैं। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पड़ाव से लेकर महाराजपुर तक अधिकांश पेड़ काट दिए गए। अब ग्रीन बेल्ट की अंतिम बची जमीन भी खतरे में है ।
2018 से 2022 के बीच पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था और निर्माण रोका गया था। लेकिन अब नपा ने फिर से प्रस्ताव बनाकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
नियमों के विरुद्ध
ग्रीन बेल्ट जमीन पर टंकी निर्माण का टेंडर जारी हो चुका है, जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों का उल्लंघन है। यदि निर्माण जारी रहा तो कार्रवाई तय है।
अधिकारी का कहना है
“ग्रीन बेल्ट से संबंधित जानकारी टाउन एंड कंट्री मास्टर प्लान से ही स्पष्ट होगी। दस्तावेज देखकर ही कह पाऊँगा कि पेयजल टंकी ग्रीन बेल्ट पर है या नहीं।”
जय प्रकाश डेहरिया, उपयंत्री, नपा मंडला
