
धार. कोई भी जगह का वहा की धरोहर का महत्व होता है। एसा ही यथा नाम गुण को प्रकट करता है अनंत नारायण मंदिर जिसका कोई अंत नही है अनंत । शहर के मध्य आनंद चौपाटी पर स्थित नारायण अनंत नारायण के विषय में कहा जाता है कि जो भी यहा आकर मन्नत लेता है वह अवश्य पूरी होती है। इसका अपना अलग विधान है। कहते है जब कृष्ण जन्म पर श्री कृष्ण को टोक्री मे वासुदेवजी यमुना पार कर कर रहे थे जौरो के तूफान में अनंत देवता शेषनाग ने अपने फनो से श्री कृष्ण पर छाव की थी। वही स्वरुप है श्री अनंत नारायण पाण्डवो द्वारा भी 14 वर्षो तक अनंत व्रत का पालन किया गया जिससे उन्हें कोरवो पर विजय प्राप्त हुई इस अनंत वृत के विषय में मान्यता है कि इस वृत को लगातार 14 वर्षों तक किया जाता पूजन किया जाता है यमुना नदी का या यमुना नदी के जल का चौदह गठान वाले धागे का “श्री, मोहिनी, पक्मिनी, महाबला, अजा मंगला, वरदा, शुभा जया विजया, जयन्ति, पापनाशिली विश्वरूपा, सर्व मंगला, इन चौदह नामो से पूजन करक (बाह) भूजा में बाधा जाता ” है। अनंत नारायण को मालपुये का भोग लगाया जाता है व अपनी कामना पूर्ण होने आशिर्वाद मांगा जाता है ये यह बहुत जाग्रत व फलदायी मंदिर है जहाँ मांगी हर इच्छा पूरी होती है। भगवान अनंत नारायण विष्णु के अवतार अनंत चतुर्दशी अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। 06/09/2025 शनिवार को दोपहर 12 बजे आरती होगी.
