नयी दिल्ली, 04 सितंबर (वार्ता) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में आए बदलाव के कारण मत्स्य पालन की लागत में कमी होने जा रही है।
जीएसटी परिषद की बुधवार को हुई बैठक में मछुआरों को राहत देने के लिए कई तरह की चीजों पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर अथवा जीएसटी की दरों में बदलाव करने को स्वीकृति दे दी गई।
मछुआरों के लिए डीजल इंजन, पंप, एयरेटर पर जीएसटी को 12 और 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इससे मछुआरों की लागत कम होगी। इसके अलावा तालाब तैयार करने और जल गुणवत्ता प्रबंधन में उपयोग किए जाने वाले अमोनिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे महत्वपूर्ण रसायनों पर भी जीएसटी पहले के 12 से 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे मछली का चारा, तालाब की देखभाल पर आने वाली लागत घटेगी।
इसके अलावा मछली पकड़ने की छड़, जाल और संबंधित चीजों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। इससे पूंजीगत लागत कम होगी और इस क्षेत्र में आजीविका को समर्थन मिलेगा।
इसके अलावा संशोधित ढांचे के तहत, मछली के तेल, मछली के अर्क और तैयार या संरक्षित मछली और झींगा उत्पादों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे मूल्यवर्धित समुद्री भोजन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती हो गया है।
दुनिया का सबसे बड़ा झींगा निर्यातक भारत मत्स्य पालन और संबंधित क्षेत्र में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। इसने खाद्य और पोषण सुरक्षा, किसानों की आय, ग्रामीण आजीविका और निर्यात में खासा योगदान दिया है। यह क्षेत्र आज तीन करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का आधार है और आज भारत लगभग 195 लाख टन (2024-25) के उत्पादन के साथ वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन कर सामने आया है।

