वीरेंद्र वर्मा
इंदौर: प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था ने दो नवजात शिशुओं की बलि ले ली. दोनों नवजात की मृत्यु से इंदौर में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है. यह घटना तब हुई है, जब इंदौर 8वीं बार स्वच्छता का तमगा लिए घूम रहा है. चूंकि स्वास्थ्य का मामला स्वच्छता से सीधा जुड़ा हुआ है, तो सवाल उठना स्वाभाविक भी है. पिछले 30-35 सालों से एमवाय कायाकल्प की बांट जोह रहा है और अपने बुढ़ापे एवं अव्यवस्थाओं पर आंसू भी बहा रहा है. इसके पीछे एक मात्र कारण मानव स्वास्थ्य को लेकर सरकारों द्वारा उदासीनता बरती जाना है.
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का विकास में नवाचार का चेहरा बन विभिन्न आयाम स्थापित करने के दावे किया जा रहे हैं. क्या वास्तविकता में इंदौर विकसित हो गया है? यदि ऐसा है तो इंदौर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में चूहों के आतंक और अस्पताल की दुर्दशा पर क्यों स्वास्थ्य विभाग की नजर नहीं पढ़ रही है? इंदौर को लेकर बड़ा प्रचारित किया जाता है कि मेडिकल और शिक्षा का बड़ा केंद्र है.
सवाल यह है कि क्या निजी क्षेत्र के हॉस्पिटल और निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थान ही इसकी पहचान है? क्यों सरकारी अस्पताल में ऐसी बदहाली है कि किसी के नवजात शिशुओं को चूहों ने कुतर दिया और वे नवजात शिशु आज काल के गर्त में समा गए. इसका जिम्मेदार कौन? शासन प्रशासन कुछ रुपए देकर पीड़ित का मुंह बंद करवा देगा। इससे क्या हालत सुधर जाएंगे?
एमवाय में यह पहली बार नहीं हुआ है. कई बार कई तरह की दुर्घटना हो चुकी है, जिसमें कभी ऑक्सीजन का पाइप चूहों ने काट दिया, कभी दवाई नहीं मिलने, कभी सतर्कता नही बरतने, साधन संसाधन की कमी होने और सबसे ज्यादा समय पर मरीज को इलाज नहीं मिलने की शिकायत लगातार सामने आती है. इस बीच कभी नर्स तो कभी डॉक्टर, कभी जूनियर डॉक्टर की हड़ताल स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलने नहीं देती है.
जरा उस मां से पूछिए कि चूहों ने उसके नवजात शिशुओं को कुतर दिया और उनके इन्फेक्शन को नवजात झेल नहीं सके और दुनिया से रुखसत हो गए. मां का क्या हाल होगा? आखिर एमवाय हॉस्पिटल के अधीक्षक और डीन इतनी मोटी तनख्वाह पर क्यों है? इंदौर और प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में साफ सफाई और संसाधनों का रख रखाव नहीं हो पा रहा है। क्यों ?
मोहंती के ऑपरेशन एम. वाय की आज भी जरूरत
1990 के दशक में तत्कालीन कलेक्टर सुधीर रंजन मोहंती ने इंदौर में ऑपरेशन एमवाय चलाया था. एक हफ्ते से ज्यादा चले ऑपरेशन में करीब 10 कोठी भरकर चूहे मारकर निकाले गए थे. यह मोहंती ने केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी पर कार्रवाई की थी. कुछ लोग सूरत फैले फ्लैग को दृष्टिगत रखकर की गई कार्रवाई भी बताते हैं. कलेक्टर मोहंती के इस कार्य की उस समय पूरे इंदौर सहित प्रदेश में चर्चा और सराहना की गई थी. चूहों के कुतरने के बाद आज भी ऑपरेशन एम.वाय. की जरूरत महसूस की जा रही है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा था, इस अस्पताल को बम से उड़ा देना चाहिए
कांग्रेस सरकार के केंद्रीय मंत्री माखनलाल फोतेदार ने 90 के दशक में एमवाय का दौरा किया था. उस दौरान वहां चूहों और अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर फोतेदार ने कहा था कि इस अस्पताल को बम से उड़ा देना चाहिए. उनका एमवाय अस्पताल को लेकर दिया यह बयान खूब चर्चित हुआ था और कई दिनों तक एम.वाय. को लेकर खबरें छपी थी.
मई की मंत्रिमंडल बैठक में 773 करोड़ से कायाकल्प की घोषणा
इंदौर के राजबाड़ा में 20 मई को राज्य सरकार मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी. बैठक में एम. वाय. अस्पताल के कायाकल्प और नए भवन निर्माण करने के लिए 773 करोड़ रुपए राशि की मंजूरी दी गई थी. इसके बाद आज तक एम.वाय. अस्पताल को लेकर वो घोषणा और राशि सिर्फ बयानों तक सिमट कर रह गई.
