ड्यूटी से हटने के बाद भी वार्ड में धमकाती रही वार्ड आया

सतना जिला चिकित्सालय में पदस्थ कुछ कर्मचारी अपने रसूख के बलबूते नियम और कानून को किस कदर जूते की नोक पर रखते हैं इसकी एक बानगी मंगलवार को देखने को मिली. शिकायत के चलते ड्यूटी से हटाई गई वार्ड आया न सिर्फ वार्ड 4 में मौजूद रही बल्कि वह शिकायकत्र्ता के परिजनों को सरेआम धमकाती भी रही. इतना ही नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को ताक पर रखते हुए वार्ड आया ने डिस्चार्ज होने के बावजूद भी शिकायतकत्र्ता की पत्नी और नवजात को तकरीबन बंधक बनाकर वार्ड से बाहर जाने पर रोक लगा दी.

जिला अस्पताल के पोस्ट ऑपरेटिव मेटरनिटी वार्ड क्रमांक 4 में पदस्थ वार्ड आया सत्तन कुशवाहा द्वारा अपने हाथ में चप्पल लेकर प्रसूता के पति और अस्पताल के सुरक्षा कर्मी को मारने के लिए दौड़ाने की घटना सामने आई थी. इस मामले की शिकायत फरियादी द्वारा अस्पताल चौकी के साथ-साथ सिविल सर्जन कार्यालय में भी की गई थी. मामले को संज्ञान में लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए एक ओर जहां वार्ड आया को ड्यूटी से हटा दिया गया था. वहीं दूसरी ओर मामले की जांच की जिम्मेदारी आरएमओ डॉ. शरद दुबे और सहायक अस्पताल प्रबंधक डॉ. धीरेंद्र वर्मा को सौंप दी गई. इसी कड़ी में मंगलवार को सहायक अस्पताल प्रबंधक डॉ. वर्मा द्वारा फरियादी के बयान लिए गए. लेकिन मामले में नया पेंच तब आ गया जब ड्यूटी से हटाए जाने के बावजूद भी वार्ड आया मंगलवार को वार्ड क्र. 4 में पहुंच गई. चूंकि फरियादी की पत्नी और नवजात को मंगलवार को ही अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाना था. इसलिए वार्ड मौजूद नर्स द्वारा डिस्चार्ज से संबंधित दस्तावेज परिजनों को सौंप दिए. लेकिन जैसे ही परिजनों ने प्रसूता और नवजात को अस्पताल से घर ले जाने की तैयारी शुरु की वैसे ही वार्ड आया सत्तन कुशवाहा वहां पहुंच गई. वार्ड आया ने परिजनों को धमकाते हुए कहा कि उसकी मर्जी के बिना वे लोग बाहर नहीं जा पाएंगे. चंूकि उस दौरान महिला और नवजात के पास फरियादी की मां और बहन ही मौजूद थीं. लिहाजा वे काफी देर तक वहीं पर डरी सहमी बैठी रहीं. इतना ही नहीं बल्कि वार्ड में मौजूद चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ भी वार्ड आया की मनमानी के आगे बेबस नजर आया.

हस्ताक्षर कराए, अंगूठा लगवाया

लगभग डेढ़ घंटे तक महिला, नवजात और उसके परिजनों को बंधक बनाए रखने के बाद वार्ड आया ने एक कागज सामने रख दिया. धौंस के दम पर जहां उक्त कागज पर फरियादी की बहन से हस्ताक्षर करा लिए. वहीं उसकी मां से अंगूठा लगवा लिया गया. जिसके बाद शिकायत वापस लेने की धमकी देते हुए उन्हें वहां से बाहर निकलने दिया गया. वार्ड आया के तेवर का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब ड्यूटी से हटाए जाने के बावजूद भी उसकी वार्ड में मौजूदगी की जानकारी सहायक अस्पताल प्रबंधक को हुई तो उन्होंने उसे तलब कर लिया. सहायक प्रबंधक ने वार्ड आया से स्पष्ट ताकीद की कि जब उसे ड्यूटी से हटाया गया है तो फिर वह वार्ड में क्या कर रही है. जिस पर वार्ड आया ने सहायक प्रबंधक को दो टूक लहजे में बताया कि उसकी जब मर्जी होगी वह ऐसे ही आएगी और जाएगी, उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर सकता

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