
सतना . सतना में 2 हजार 600 मीट्रिक टन उर्वरक का रैक पहुंचने के बावजूद भी जब किसानों की परेशानी कम नहीं हुई तो नाराज होकर उन्होंने उर्वरक से लदे ट्रक को कोठी रोड पर मर्कफेड गोदाम के सामने रोक लिया. किसानों के हंगामे के चलते लगभग आधे घंटे तक सतना-चित्रकूट मार्ग बाधित रहा. एसडीएम और थाना प्रभारी की समझाइस के बाद किसी तरह बात बनी.
हर रोज की तरह मंगलवार की सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में किसान लाइन लगाकर उर्वरक लेने के लिए अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. किसानों को इस बात की जानकारी हो चुकी थी कि एक दिन पहले ही सतना रेलवे स्टेशन परिसर में उर्वरक से लदा एक रैक आया है. लिहाजा वे उर्वरक का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. लेकिन इसके बावजूद भी जब किसानों को इस बात की जानकारी मिली कि उर्वरक उपलब्ध नहीं है, तो उनका गुस्सा बढ़ गया. इसी दौरान उन्हें कोठी रोड पर उर्वरक से लदा एक ट्रक जाता नजर आ गया. जिसे देखते ही किसानों ने ट्रक को रोक लिया. आक्रोशित होते हुए किसानों ने कहा कि मर्कफेड के गोदाम में उर्वरक उपलब्ध नहीं है, सैकड़ों किसान लाइन में खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं और उर्वरक को कहीं और भेजा जा रहा है. इसी कड़ी में किसान एकत्रित होकर सडक़ पर पहुंच गए. जिसके चलते उक्त मार्ग पर देखते ही देखत जाम लगना शुरु हो गया. घटना की जानकारी मिलने पर सिविल लाइन थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह परिहार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए और स्थिति को संभालने का प्रयास किया. वहीं कुछ देर बाद ही एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिय़ा भी पहुंच गए. एसडीएम ने किसानों का समझाया कि पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो चुका है. लिहाजा किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. इसी कड़ी में उप संचालक कृषि आशीष पाण्डेय ने भी जानकारी दी कि 2 हजार 600 मीट्रिक टन उर्वरक का रैक सोमवार को ही सतना पहुंच चुका है. रेल परिसर स्थित माल गोदाम से विभिन्न स्थानों पर उर्वरक ले जाया जा रहा है. यह सुनकर किसान सडक़ से हटने को राजी हो गए.
आटो से उतरवाई खाद
उर्वरक की मारामारी से परेशान बिरसिंहपुर के किसानों का गुस्सा उस वक्त बढ़ गया जब उर्वरक की बोरियों से लदे एक आटो को पकड़ लिया गया. किसानों के अनुसार उन्होंने एक आटो में 15 बोरी और 16 बोरी को उर्वरक को संदिग्ध तौर पर लादकर ले जाते हुए देखा. जिसके चलते आटो चालक को रोकर वाहन खड़ा करा लिया गया. वहीं सूचना देकर तहसीलदार शैलेंद्र शर्मा को भी मौके पर बुला लिया गया. वैध दस्तावेज नहीं होने पर तहसीलदार ने यह कहते हुए उर्वरक को आटो से उतरवा लिया कि किसानों के लिए प्राथमिकता है, दलालों के लिए नहीं.
