
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अवैध खनन मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान न्यायपालिका की निष्पक्षता का एक उदाहरण सामने आया है। जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुलासा किया कि एक भाजपा विधायक ने उनसे पेंडिंग केस पर संपर्क साधने की कोशिश की थी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन्होंने तुरंत इस मामले से खुद को अलग कर लिया और केस को अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
यह केस अवैध खनन के आरोपों पर कार्रवाई की मांग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) पर समयबद्ध जांच न करने का आरोप लगाया था। वहीं विधायक संजय पाठक ने भी अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति चाही थी, हालांकि वे इस रिट में पक्षकार नहीं थे।
जस्टिस मिश्रा का यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता के भरोसे को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
